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गो अभयारण्य कमेटी की बैठक में सुझाव, मुफ्त में जमीन दे सरकार

5 वर्ष पहले
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ढंढ़ूरके पास बनने वाले गो अभयारण्य के लिए सरकार से मुफ्त में जमीन मांगी जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को जल्द ही भेजा जाएगा। मंगलवार को गो अभयारण्य के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक हुई। इसमें हाउस की बैठक में पास हो चुके प्रस्ताव का जिक्र किया गया। जबकि निगम अभयारण्य की 50 एकड़ जमीन के लिए 22 करोड़ रुपये का इंतजाम कहां से करेगा, इसे लेकर भी मंथन किया गया। डीसी डाॅ.चंद्रशेखर खरे की अध्यक्षता में गो अभयारण्य के लिए गठित कमेटी की पहली ही बैठक में सुझाव दिए कि आखिर 44 लाख रुपये लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन के दाम निगम प्रशासन कहां से जमा करेगा। यह रकम जीएलएफ को जमा कराने होंगे। ऐसे में बैठक में यह सुझाव दिए कि सरकार या तो मुफ्त में जमीन दिलाए या फिर जमीन के लिए तय रकम प्रशासन खुद ही जमा कराए। इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव सरकार के पास भेज जाएगा। बैठक के दौरान नगर निगम के ईओ अरविंद कुमार बिश्नोई आदि मौजूद रहे।

प्रस्ताव सरकार के पास भेजा जाएगा

^निगमप्रशासन के पास 22 करोड़ की रकम जमा कराने के लिए इतना बजट नहीं है। इसलिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा कि मुफ्त में जमीन दी जाए या फिर सरकार ही जमीन के दाम जमा करा दे।\\\'\\\' सरजीतनैन, सीटीएम ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम।

कमेटी के सदस्यों की बढ़ेगी तादाद

गोअभयारण्य के लिए गठित कमेटी में सदस्यों की तादाद बढ़ाई जाएगी। अभी डीसी, निगम के ईओ, पशुपालन विभाग के अलावा दो अन्य सदस्य भी हैं। अभी कमेटी की पहली बैठक थी। बैठक में यह भी तय हुआ कि इस कमेटी में सदस्यों की तादाद बढ़ाए जाए।

हाउस की बैठक में पास हुए प्रस्ताव

शहरके विकास कार्यों के लिए मुफ्त में जमीन दिए जाने के लिए हाउस की बैठक में 2 फरवरी को प्रस्ताव पास हो चुका है। इसी प्रस्ताव को आधार बनाते हुए प्रशासनिक अधिकारी सरकार से मुफ्त में जमीन मांगने की तैयारी में हैं।

बीज निगम को कचरा मुफ्त में देगा निगम

शहरसे निकलने वाले कचरे को निगम प्रशासन बीज निगम को मुफ्त में देगा, जिससे बीज निगम कचरे से खाद बना सके और प्रोजेक्ट भी शुरू कर सके। यह जानकारी निगम के एमई जगदीश चंद्र ने दी, मंगलवार को नगर निगम और बीज निगम के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि जल्द ही नगर निगम एक रिपोर्ट बीज निगम को मुहैया कराएगा।

> आमदनीहै नहीं, 70 फीसदी बजट खप जाता है सेलरी पर : सरकारकी तमाम कोशिशों के बावजूद निगम प्रशासन के आमदनी के स्रोत नहीं बढ़ सके हैं। सालाना बजट का 70 फीसदी हिस्सा तो सेलरी पर ही खर्च हो जाता है। ऐसे में निगम को बजट की जरूरत है।

> प्रोजेक्टही अटके, अभयारण्य के लिए कैसे होगी व्यवस्था: पटेलनगर के आरयूबी के लिए सवा दो करोड़ रुपये जमा कराने से लेकर धोबीघाट, मल्टीस्टोरी पार्किंग तक के प्रोजेक्ट बजट के अभाव में अटके पड़े हैं। ऐसे में निगम के पास सरकार से बजट मांगने के अलावा कोई चारा नहीं है।

> खुदजमा कराए तो एक झटके में आधा बजट होगा साफ: यदिनिगम प्रशासन अपने ही स्तर से 22 करोड़ रुपये जमा कराता है तो सालाना बजट की आधी रकम को गो अभयारण्य की जमीन के लिए खर्च हो जाएगा। फिर निगम कर्मचारियों की सेलरी से लेकर अन्य खर्चे कैसे पूरे होंगे।

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