एनआरसीई की ट्विनिंग लैब से संतुष्ट दिखे वैज्ञानिक
ग्लैंडर्सबीमारी से ग्रस्त घोड़े, खच्चर गधों को मारने की स्वीकृति देने पर सरकार उनके मालिकों को मुआवजा देने की नीति बनाएगी। इससे पहले कुछ चुनिंदा राज्यों में ही मुआवजा देने का नियम बनाया गया था। बाकी राज्यों में एेसा नियम नहीं होने से ग्लैंडर्स बीमारी के निदान में भारी दिक्कत रही थी। इस परेशानी से निजात मिल सके इसके लिए अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को मुआवजा देने के लिए प्रपोजल दिया है जो लगभग पारित भी हो चुका है।
यह जानकारी सिरसा रोड स्थित एनआरसीई में चल रही कार्यशाला के दौरान दी गई। कार्यशाला में ओआईई यानि वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन जर्मनी के निदेशक अपनी टीम सार्क देशों के वैज्ञानिक इस बीमारी पर मंथन करने के लिए पहुंचे हैं। जर्मनी से टीम के साथ अाए आेआईई के निदेशक एनरिक न्यूबॉर ने बातचीत के दौरान एनआरसीई की लैब के बारे में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वो मानकों के आधार पर लैब में किए जाने वाले काम से संतुष्ट है। बनाई गई रिपोर्ट को वो ओआईई के हेड ऑफिस भेजेंगे। इसके बाद पूरी संभावना है कि लैब को ग्लैंडर्स बीमारी पर काम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दर्जा दे दिया जाए। उन्होंने कहा कि हिसार शहर बहुत ही शानदार है आैर यहां बने अश्व अनुसंधान से मिलकर भविष्य में नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं। जर्मनी से समझौते के तहत एनआरसीई में ग्लैंडर्स बीमारी की जांच के लिए ट्विनिंग लैब बनाई गई है। इस लैब के प्रोजेक्ट का समय पूरा हो गया है और इसके मानकों की जांच करके अंतरराष्ट्रीय लैब का दर्जा देने पर विचार करना भी कार्यशाला का प्रयोजन है।
मुआवजेकी आवश्यकता
कार्यशालामें प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि जिन लोगों के लिए घोड़े, खच्चर आजीविका के साधन हैं। वो लोग ग्लैंडर्स बीमारी की जांच के लिए सैंपल तक नहीं लेने देते हैं और मारने की बात पर भड़क जाते हैं। इसलिए उनके मालिकों को मुआवजा देना अनिवार्य है ताकि मालिक संक्रमित जानवरों को मारने की स्वीकृति दे दे। इसलिए सरकार को प्रपोजल भेजा गया है। जम्मू एंड कश्मीर राज्य में सरकार ने घोड़े के मारे जाने पर 25 खच्चर पर 16 हजार की राशि देना निर्धारित किया है।
कार्यशाला में पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान,नेपाल, बांग्लादेश, ईरान, अफगानिस्तान, जर्मनी से विशेषज्ञ आए हुए हैं। भास्कर से बातचीत के दौरान पाकिस्तान से आए वैज्ञानिक हाफिज अब्दुल ने कहा कि भारत के लोग दिल से इस्तकबाल करते हैं। यहां आने आने को लेकर विचार कर रहे थे, लेकिन यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। वहीं बाकी देशों के वैज्ञानिकों ने भी अपना पक्ष रखते हुए मेहमान नवाजी के लिए शुक्रिया अदा किया।
बीमारी से संक्रमित जानवरों को मारने की स्वीकृति देने पर मालिकों को मिल सकेगा मुआवजा
कार्यशाला में ग्लैडर्स बीमारी के निदान के लिए बनाई गई लैब की समीक्षा करने के लिए पहुंचे जर्मनी के सोअाएओआईई के निदेशक एनरिक न्यूबॉर टीम के साथ।