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तीसरे दिन भी धरनास्थल पर रखा रहा मनोज का शव

5 वर्ष पहले
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धरने पर बैठे भगाना के लोग मांगों पर अडिग

भगाना प्रकरण को लेकर लघु सचिवालय के गेट पर धरना स्थल पर तीसरे दिन भी मनोज का शव रखा रहा। शव के आसपास महिलाएं एवं पुरुष बैठे रहे। पीड़ित परिवार अपनी मांगों पर अडिग है। धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि मांगें पूरी होने से पहले शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए एक सदस्य को नौकरी दी जाए। वहीं शनिवार को एहतियात के तौर पर पुलिस फोर्स के साथ अफसर धरनास्थल के निकट ही डेरा डाले रहे।

दिल्ली में इलाज के दौरान मनोज की मौत होने के बाद परिवार के लोग उसके शव को यहां ले आए और पिछले कई साल से चल रहे धरनास्थल पर लाकर रख दिया। इस शव को उठाने के लिए सिविल लाइन थाना पुलिस ने पत्र भेजकर डीसी को रिपोर्ट दी है। डीसी को भेजे गए पत्र में पुलिस ने शव उठाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की अनुमति मांगी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक डीसी की ओर से अभी इस पत्र पर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है। पुलिस को डीसी के आदेश का इंतजार है।

धरनास्थल पर बर्फ की सिल्लियों पर मनोज का शव रखा हुआ। शुक्रवार को प्रशासन की ओर से एसडीएम अशोक बंसल पहुंचे थे। उन्होंने मनोज के इलाज के दौरान दवाओं पर हुए खर्च को प्रशासन द्वारा वहन किए जाने की बात रखी थी। लेकिन धरना दे रहे मनोज के परिवार के सदस्यों ग्रामीणों ने इनकार कर दिया था। इसके बाद वह वापस लौट आए थे। शनिवार को कोई अधिकारी धरना दे रहे परिवारों से बात करने के लिए नहीं पहुंचा।

लघु सचिवालय में शनिवार को धरने पर बैठे भगाना के लोग।

^धरनास्थल के निकट एहतियात के तौर पर एक कंपनी पुलिस फोर्स तैनात है। पुलिस अधिकारी धरना स्थल पर होने वाली हर गतिविधि की निगरानी कर रहे हैं। धरनास्थल पर कौन आ-जा रहा है। इसकी फोटो और वीडियोग्राफी करायी जा रही है।’’ जयपालसिंह, डीएसपी सिटी।

भगाना गांव के दलित पिछले लंबे समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरनारत है। भगाना कांड के पीडि़त मनोज को धरने पर लगातार स्वास्थ्य खराब होने के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में दाखिल करवाया गया था और डॉक्टर 15 दिन दाखिल रखने के बाद भी उसे बचाने में नाकामयाब रहे।

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