एचएयू में प्रोफेसर ही लिख पाएंगे किताब
चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पत्र जारी कर शिक्षकों पर किताबें लिखने पर एक प्रकार से रोक लगा दी है। प्रशासन की तरफ से लगाई गई शर्तों के मुताबिक अब केवल प्रोफेसर रैंक के शिक्षक ही किताब लिख पाएंगे, मगर इसके लिए भी उन्हें यूनिवर्सिटी के उच्चाधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। प्रदेश की बाकी किसी भी यूनिवर्सिटीज में किताब लिखने के लिए शिक्षकों पर इस प्रकार की बंदिशें नहीं हैं।
दरअसल, एचएयू के रजिस्ट्रार डॉ. एमएस दहिया की ओर से 20 जनवरी को जारी पत्र में किताब लिखने के लिए शिक्षकों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सभी डीन, डायरेक्टर हेड आॅफ दी डिपार्टमेंट में कहा गया है कि भविष्य में किताब लिखने के लिए शिक्षकों द्वारा नए दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।
रजिस्ट्रार की यह चिट्ठी विभागों में पहुंचने के साथ ही शिक्षकों में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की शर्तें पहले यूनिवर्सिटी में कभी नहीं लगाई गई। शर्तें लगाने से तो कोई शिक्षक किताबें लिख ही नहीं पाएगा। वहीं यह भी कोई मापदंड नहीं है कि केवल प्रोफेसर रैंक का शिक्षक ही बेहतर किताब लिख सकता है और एसोसिएट असिस्टेंट प्रोफेसर बढ़िया किताब लिखने की क्षमता नहीं रखते।
असिस्टेंटप्रोफेसर लिख सकता है केवल चैप्टर
यूनिवर्सिटीप्रशासन के नए दिशा निर्देशों के अनुरूप प्रोफेसर ही केवल किताब लिख सकता है। प्रोफेसर को भी किताब लिखने के लिए डिपार्टमेंट एडवाइजरी कमेटी को लिखना होगा। कमेटी उसे अप्रूव्ड करके संबंधित कंट्रोलिंग आॅफिसर के पास रिकमंडेशन के लिए भेजेगी। एसोसिएट प्रोफेसर एडिट बुक लिख सकता है जबकि चार साल का शैक्षणिक अनुभव रखने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर किताब में केवल चैप्टर ही लिख सकते हैं।
किसीयूनिवर्सिटी में नहीं है ऐसा प्रावधान
शिक्षकोंकी मानें तो बाकी भी यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के लिए किताब लिखने पर इतनी शर्तें नहीं हैं। एचएयू जहां किताब की रायल्टी में भी शेयर मांगती है जबकि दूसरी यूनिवर्सिटियों में ऐसा कुछ नहीं है। वहां के शिक्षक कहीं भी किताबें लिखने को स्वतंत्र है। लेखन कार्य को शैक्षणिक कार्य से ही जोड़कर देखा जाता है।
^किताब लिखने को लेकर पुराने दिशा-निर्देशों के अनुसार कुछ समस्याएं सामने आई थीं और उसके बाद ही नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। यूनिवर्सिटी की परमिशन लेकर प्रोफेसर किताब लिख सकता है। डॉ.एमएस दहिया, रजिस्ट्रार, एचएयू।
^हौटा ऐसे किसी भी दिशा-निर्देशों का विरोध करेगी जिसमें शिक्षकों पर किताब लिखने के लिए शर्तें थोपी गईं हो। बाकी किताब लिखने के लिए अनुभव भी जरूरी होता है। डॉ.राज सिंह, अध्यक्ष एचएयू शिक्षक संघ।
^हम नाॅलेज और स्किल को किसी डेजिगनेशन में बांध नहीं सकते। बहुत से लोग ऐसे हुए हैं जिन्होंने किताबें लिखी हैं, लेकिन वो प्रोफेसर नहीं हैं। ऐसे भी केस सामने हैं कि प्रोफेसर की लिखी किताब नहीं चल पाई और उसी विषय पर किसी दूसरे व्यक्ति की लिखी किताब बिकी। प्रो.बीके पूनिया, कुलपति, एमडीयू।