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एंबुलेंस हड़ताल से मरीजों की जान पर आफत, नंबर 102 से भी निराशा लगी हाथ

5 वर्ष पहले
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हिसार। एंबुलेंस चालकों की बेमियादी हड़ताल से मरीजों की जान आफत में हैं। अस्पतालों में उन मरीजों की सांसें अटकी हैं, जिनका इलाज कर रहे चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस ढूंढ़ने में मुश्किल हो रही है। यही नहीं मरीजों को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर पहुंचाने के लिए भी एंबुलेंस की सुविधा न मिलने से दिक्कत हो रही है। आखिर वे कैसे अपने मरीजों को घर या इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाए। प्राइवेट एंबुलेंस मिल नहीं रही। सरकारी सेवा 102 की एंबुलेंसों ने भी मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों से ले जाने में हाथ खड़े कर दिए हैं।

शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में कैथल के नफेसिंह भर्ती हैं। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा हुआ है। ब्रेन हैमरेज से पीड़ित नफेसिंह को चिकित्सकों ने घर या किसी अन्यत्र अस्पताल में ले जाने के बोल दिया है। परिजनों ने प्राइवेट एंबुलेंस चालकों को फोन किया, लेकिन हड़ताल के कारण उन्होंने सेवाएं देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके परिजनों ने 102 पर भी एंबुलेंस के लिए संपर्क साधा तो यहां से एंबुलेंस भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने सीएमओ से भी संपर्क साधा लेकिन उन्हें एंबुलेंस मयस्सर नहीं हुई।
मरीज वेंटिलेटर पर, डाॅक्टरों ने हाथ खड़े किए
शहर के एक निजी अस्पताल में पंजाब के डूंडिया गांव के गुरुपाल सिंह भर्ती हैं। अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। डाॅक्टरों ने उनके इलाज से हाथ खड़े कर दिए हैं। अस्पताल ने उन्हें घर या कहीं और ले जाने की सलाह दी है। उनके परिजन प्रविंद्र ने प्राइवेट एंबुलेंस से संपर्क साधा, लेकिन कोई बात नहीं बनी। इसके बाद उन्होंने भी 102 पर सरकारी एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया तो आने से इनकार कर दिया है। परिजनों ने सीएमओ से संपर्क साधना चाहा, पर उनसे संपर्क नहीं हो सका।
डीसी के हस्तक्षेप के बाद मिली एंबुलेंस
बालसमंद की पूजा ने शहर के एक निजी अस्पताल में सात माह के बच्चे को जन्म दिया। बच्चे की हालात देख चिकित्सकों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली ले जाने सलाह दे दी। महिला के परिजनों ने प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों से संपर्क किया तो हड़ताल के कारण हाथ खड़े कर दिए। परिजनों ने डीसी को फोन किया तो डीसी के यहां से सीएमओ को व्यवस्था के निर्देश दिए। कुछ समय बाद पहुंची सरकारी एंबुलेंस ने बच्चे को चंड़ीगढ़ पहुंचाया।
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