हिसार। खरीफ की बर्बाद फसलाें के मुआवजे की मांग को लेकर पांच जिलों के किसानों और मजदूरों ने लघु सचिवालय के बाहर महापड़ाव डाल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया है कि तब तक सरकार मुआवजा आवंटन की घोषणा नहीं करेगी, वे अपने घर वापस नहीं जाएंगे। महापड़ाव के कारण सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को रास्ता बदल कर निकलना पड़ा। वे कोर्ट परिसर की तरफ से बाहर निकले।
दोपहर से लेकर शाम तक नारेबाजी और भाषणबाजी के बाद प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर तंबू लगा दिए हैं। किसानों-मजदूरों के खानपान के लिए भंडारा शुरू हो गया है। देर रात तक प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने का काम जारी था। दूसरी तरफ रात काटने के लिए रागनियों और गीतों का दौर चल रहा था। कोई हुक्का गुड़गुड़ा रहा था तो कोई ताश खेलकर टाइम पास कर रहा था। ये प्रदर्शनकारी गुरुवार सुबह अखिल भारतीय किसान सभा और खेत मजदूर यूनियन के बैनर तले क्रांतिमान पार्क में इकट्ठा हुए थे।
हिसार के अलावा सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी और जींद से सैकड़ों की तादात में किसान-मजदूर महापड़ाव में शामिल होने पहुंचे थे। इनमें महिलाओं की संख्या भी प्रभावशाली थीं। ये पार्क से जुलूस के रूप में सचिवालय के बाहर पहुंचे अौर फिर डेरा जमाकर बैठ गए। इसके बाद किसान सभा के राज्य प्रधान मास्टर शेरसिंह और खेत मजदूर के राज्य नेता रामकुमार बहबहलपुरिया की संयुक्त अध्यक्षता में जनसभा शुरू हुई, जिसे किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव हनान मोल्ला ने भी संबोधित किया। शाम को महिलाओं और काफी संख्या में पुरुषों को वापस भेज दिया। इसके बावजूद सैकड़ों किसान-मजदूर यहां डटे रहे।
महापड़ाव का युवा किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष अनिल लितानी ने समर्थन किया है। प्रदर्शनकारियों को किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह, फूलसिंह श्योकंद, दयानंद पूनियां, रामस्वरुप भूना, राजकुमार सिरसा, रामअवतार, पार्षद बलवान बागड़ी, कैप्टन प्रेम प्रकाश, रोहताश नगुरा, कैथल के प्रधान महेन्द्र सिंह, सुनीता कुंगड़ ने सम्बोधित किया। पड़ाव का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सुरेन्द्र मलिक ने भी समर्थन किया है। मजदूरों के नेता सुरेश कुमार, सुखबीर सिंह, पूर्व कर्मचारी नेता आरसी जग्गा ने सम्बोधित किया।
किसान अब आत्महत्या नहीं करेंगे : मोल्ला
सभाके राष्ट्रीय महासचिव हनान मोल्ला ने कहा कि चाहे भूमि अधिग्रहण का सवाल हो या नया बिजली बिल लाकर खेती को कंपनियों के हवाले करने की बात हो, भाजपा सरकार किसान विरोधी साबित हुई है। इसका हल मैदान में मजबूत लड़ाई लड़कर हासिल हो सकता है, लेकिन आत्महत्या नहीं करेंगे। सभा के राज्य महासचिव एवं पूर्व विधायक हरपाल सिंह ने कहा कि पहले सरकार ने आश्वासन दिया था कि पंचायत चुनाव के बाद मुआवजा देंगे, लेकिन अब गिरदावरी की बात कहकर किसानों को अपमानित किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पांच जिलों में 30 लाख एकड़ का एरिया प्रभावित
सभाके जिला सचिव प्रदीप कुमार ने कहा कि 2015 की खरीफ फसलों में कपास और गवार सफेद मक्खी से बर्बाद हो गई थी जबकि बाजरा सूखे से खराब हो गया था। इन फसलों की गिरदावरी रिपोर्ट को सरकार छिपा रही है मगर सभा ने अपने स्तर पर सर्वे कराकर मोटे तौर पर नुकसान का आंकलन किया है। उन्होंने दावा किया कि हर तहसील में 70 हजार से एक लाख एकड़ तक की फसलें बर्बाद हुई हैं। इस तरह पांच जिलों में करीब 30 लाख एकड़ का एरिया प्रभावित हुआ है। सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने गिरदावरी की रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी थी मगर सरकार अब गिरदावरी का एरिया घटाना चाहती हैं। तभी हरियाणा में पहली बार एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने दौरा किया था। दूसरी तरफ खेत मजदूर नेता रामकुमार बहबलपुरिया ने मनरेगा को लागू करना खाद्य सुरक्षा की बात को प्रमुखता से रखा।