हिसार. आरक्षण को लेकर संघर्ष का स्वरूप कैसा हो? इस सवाल का जवाब जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने मंच से कई बार मांगा। वक्ताओं से अनुरोध भी किया, वह आंदोलन के तरीके पर टिप्पणी करें, मगर वक्ताओं ने सटीक जवाब नहीं दिया। आखिरकार सांगवान के इशारे पर मंच के पीछे कुछ लोगों का जमावड़ा लगा। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला प्रधान दलजीत पंघाल ने सीधा सवाल किया- अगर पड़ाव डाल दें तो संभाल लोगे। फिर दस मिनट तक इंतजामों पर बात हुई और जाटों ने रेलवे ट्रैक की तरफ कूच कर दिया।
ऐसा लगता है, जैसे भिवानी से भगाना के सफर में सांगवान तय करके आए थे - फिर से मोर्चा लगाना है। हालांकि यह फैसला लेने में सांगवान खेमा थोड़ा झिझक भी रहा था। मुख्यमंत्री के साथ सर्वखाप नेताओं के समझौते का असर था या फिर तैयारियों में कमी, भगाना में राज्यस्तरीय रैली के लिहाज से हाजिरी कम थी। इस बात को रैली के आयाेजकों ने भी महसूस किया। तभी सांगवान ने कहा, रैली की जगह बदलने का असर है।
दूसरी तरफ रैली में आए लोगों ने कहा कि सरकार और खापों में 31 मार्च तक समझौता की वजह से भी लोग नहीं आए। एक बुजुर्ग ने बताया कि उसके गांव में रैली काे लेकर मीटिंग में 90 लोग आए थे, मगर यहां रैली में 20 भी नहीं पहुंचे।
खैर, सांगवान ने हाजिरी कम होने के अहसास के बावजूद मजबूत फैसला लिया। मगर इससे पहले उन्हें आसपास के गांवों से सहमति लेना जरूरी था। इसी कारण मंच से घोषणा हुई कि भगाना और आसपास के गांवों के तीन-चार लोग मंच के पीछे चले जाए, कुछ बात करनी है। इसके अलावा संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न जिलों के प्रमुख नेताओं को भी पीछे भेज दिया गया। इन लोगों को साथ लेकर जिलाध्यक्ष पंघाल खेत में बैठ गए।
चर्चा हुई कि अगर मोर्चा लगा दें तो कैसे चलेगा। रोटी-पानी का इंतजाम करना पड़ेगा। फिर धरने पर राेज लोग भी होने चाहिए।दूसरे जिलों से आए जाटों ने कहा, दिन को हम संभाल लेंगे, रात की आप लोग संभालो। आखिर रात को भी पड़ाव पर लोग होने चाहिए। आसपास के गांवों के लोगों ने कहा कि रात की चिंता मत करो। हमारी जिम्मेदारी है। दूसरे जिलों के लोगों ने कहा कि फिर दिन में हम लोग आते रहेंगे। अब आई खानपान के इंतजाम की। इसे लेकर भी पूछा गया कि चाय-पाणी, दाल-रोटी का इंतजाम हो जाएगा। ग्रामीणों ने हामी भर दी। इसके बाद पूर्व कमांडेंट सांगवान को बुलाया गया और पूरे इंतजाम का भरोसा दिलाया। तब सांगवान ने कहा- चलो फिर मय्यड़ ट्रैक के पास। और मंच से कूच का ऐलान हो गया।
सांगवान बोले- हमने कोई गाड़ी नहीं रोकी
पूर्व कमांडेंट सांगवान ने कहा, हम रेलवे ट्रैक के पास धरने पर बैठे हैं। ट्रैक जाम करने वाली कोई बात नहीं है। अब अगर कोई ट्रैक पर रेलगाड़ी न भेजे तो हम क्या करें। हमने कोई गाड़ी नहीं रोकी है।
ट्रैक रोका तो बसों का कुछ घंटों के लिए बदला रास्ता
हिसार | मय्यड़ में आंदोलनकारी जब ट्रैक रोक रहे थे तो प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से कुछ घंटों के लिए रोडवेज की बसों का रूट भी बदल दिया। शुक्रवार दोपहर तक तो दिल्ली, गुड़गांव, भिवानी आदि रूटों के लिए बस दिल्ली हाईवे से निकली। वहीं दोपहर के बाद भिवानी, रोहतक, दिल्ली आदि जाने वाले रूटों की बसें रास्ता दिल्ली हाईवे से बदलते हुए रायपुर से शिकारपुर होते हुए भाटला और हांसी रोड तक निकाली गईं। अब रोडवेज की तरफ से दिल्ली हाईवे पर रास्ता बंद होने की स्थिति में यही वैकल्पिक रास्ता रहेगा।
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