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उम्र के मायने नहीं, हौसले से मिलती है जीत

5 वर्ष पहले
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हिसार. ग्रामीण और शहरी आंचल से पहुंचे खिलाड़ियों का जोश सातवें आसमान पर था। सुबह का वक्त, ठंडी तेज हवा और सर्द मौसम के बावजूद जज्बा ज्यों का त्यों बरकरार था। चेहरे पर झुर्रियां, दुबले-पतले शरीर लेकिन दौड़ में फुर्ती ऐसी की युवाअों के भी छक्के छुड़ा दे। जीजेयू के स्टेडियम में आयोजित 25वीं राज्यस्तरीय मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उम्र से बुजुर्ग और दिल से जवान खिलाड़ियों ने प्रतिभा का परिचय दिया।
दो दिवसीय प्रतियोगिता के पहले दिन शनिवार को 35 से ज्यादा आयु वर्ग में महिला व पुरुष वर्ग के मुकाबले में लगभग 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग श्रेणियों व जिलों से आए बुजुर्गों ने खेलों में लाजवाब प्रदर्शन किया। हालांकि दोपहर में प्रतियोगिता के दौरान बीच में बूंदाबांदी भी होने लगी लेकिन न खेल रुके और न खिलाड़ी। चैंपियनशिप में बुजुर्गों का हौसला बढ़ाने का काम उनके पोते और पोतियों ने किया।
प्रतियोगिता में पूर्व मंत्री संपत सिंह की पत्नी कृष्णा संपत व साली बिमला सांगवान ने भी हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का उद्घाटन भिवानी के सांसद व ओलंपिक एसोसिएशन अध्यक्ष धर्मवीर सिंह ने किया। इस दौरान चरणजीत सिंह, राजेंद्र सिंह पंघाल, डॉ. धर्मबीर सिंह ढिल्लो व डॉ. आरके सांगवान आदि मौजूद रहे।
विदेश में मेडल के साथ रुपये भी चाहिए
प्रतियोगिता में आए खिलाड़ियों ने बातों-बातों में मन का मलाल को भी जाहिर किया। प्रकाश बराला, बिमला, तेजपाल देशवाल ने कहा कि नेशनल जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय खेलने के लिए विदेश में जाने के लिए धन चाहिए। मास्टर एथलीट व वेटरन खेलों में मेडल व प्रमाण पत्र ही मिलते हैं, कैश में इनाम या सहायता राशि नहीं मिलती। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खेल में भाग लेने का ख्वाब पैसों के अभाव में अधूरा रह जाता है। वहीं पानीपत से आए बलवान, कृष्ण, बिरजू, भीरा ने कहा कि वो सुबह तीन बजे घर से चले थे, स्टेडियम में न तो खाने की व्यवस्था है और न ही आसपास खाने के लिए कुछ है। प्रदेश के सभी जिलों से लोग आए हैं अगर यहां स्टॉल भी लगी होती तो जेब से भी पैसे खर्च कर लेते। उन्होंने कहा कि एक तो घर से बुजुर्गों को खेलों में भाग लेने से मना किया जाता है। ऊपर से यहां व्यवस्था ठीक नहीं हैं, ऐसे में परेशानी दोगुनी हो गई है।
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