(फोटो- दिल्ली हाईवे पर ऑटो चालक की गलती से दोपहर के वक्त जाम लग गया। करीब आधे घंटे तक वाहन चालक फंसे रहे)
हिसार। ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी शहर का चैन छीन रही है मगर, प्रशासन चुप है। ट्रैफिक पुलिस भी मदद न मिलने का रोना रो देती है। निगम प्रशासन व्यापारियों के विरोध पर अभियान चला तो देता है लेकिन, बाद में मामला ठप हाे जाता है। इन सबके बीच सड़कों को घेरकर अवैध रूप से चल रहे ऑटो यात्रियों की जेब ढीली करके चांदी कूट रहे हैं। हाल यह है कि किसी ऑटो चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो किसी के दस्तावेज अधूरे हैं। इन पर नकेल कसने के लिए अभियान तो चले, लेकिन राजनीतिक दबाव में सब मेहनत बेकर है। खैर, जनता में उबाल है। व्यापारी लामबंद हैं कि शहर को जाम और अतिक्रमण से निजात दिलानी है, चाहे जितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़े।
शहर की सड़कों पर करीब पांच से आठ हजार के बीच ऑटो दौड़ रहे हैं। हालांकि रजिस्टर्ड ऑटो की तादाद महज 1861 है। ऐसे में सवाल उठता है कि जनता का चैन छीनने वाले अवैध ऑटो पर नकेल कब कसी जाएगी। जनता अॉटो की बदौलत रोजाना जाम में फंसती है। क्योंकि सवारियों को ठूंसकर ये ऑटो जब चलते हैं तो इनकी रफ्तार अनकंट्रोल होती है। तेजी के फेर में ऑटो आड़े तिरछे फंसते हैं तो सड़क पर जाम लगना स्वाभाविक है। अब चाहे व्यापारी हो या जनता अवैध ऑटो को सड़कों पर दौड़ता हुआ नहीं देखना चाहती। ऑटो चलें, लेकिन, इनके लिए सख्त गाइड लाइन हो, जिनका पालन पुलिस, प्रशासन सख्ती से कराए।
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