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कार में दम घुटने से 5 साल के बच्चे की मौत, 3 साल की बहन भर्ती

7 वर्ष पहले
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भिवानी. अम्बेडकर कॉलोनी में रविवार को अपने ही आंगन में खड़ी कार में दम घुटने से पांच साल दीपांशु की मौत हो गई। उसकी तीन साल की बहन दीपिका को गंभीर हालत में पीजीआई, रोहतक भेज दिया गया है। दीपिका की छाती पर फोड़े उग आए हैं। दोनों भाई-बहन करीब पांच घंटे तक एसी कार में बंद रह गए थे। कार का एसी पहले से ही बंद था।

प्राप्त जानकारी मुताबिक, कोचिंग सेंटर चलाने वाले सुनील अपने दोनों बच्चों के साथ सुबह कार से कहीं बाहर से आए थे। कार अपने ही आंगन में खड़ी कर दी। बच्चे भी साथ निकल आए थे। सुनील घर के कामों में व्यस्त हो गए। इसी बीच दोनों भाई-बहन कार में चले गए। इसका पता उन्हें तब चला जब करीब चार-पांच घंटे तक दोनों नहीं दिखे। सुनील की ससुराल भी उसी मोहल्ले में है। इसलिए वो समझ बैठे कि कहीं बच्चे ननिहाल न चले गए हों। जब वहां पता करवाने पर भी दोनों के नहीं आने की बात कही गई, तब कार में देखने की सुध आई। देखा तो दोनों बेहोशी की हालत में थे। फिर कार का लॉक तोड़कर उन्हें निकाला गया। जिला सामान्य अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने दीपांशु को मृत घोषित कर दिया। दीपिका को गंभीर अवस्था में पीजीआई, रोहतक रेफर कर दिया गया।
बंद कार में ऑक्सीजन की कमी या धूप में झुलसने से मौत हो सकती है। बंद कार के अंदर कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा ज्यादा हो जाती है। क्योंकि एसी कारों में एसी, दरवाजे व खिड़कियां बंद होने पर हवा प्रवेश नहीं कर सकती। बच्ची के शरीर पर फोड़े हैं। ये कार में पैदा हुई गर्मी से हुए दिखते हैं।'
-डॉ. अनंत बासोतिया, एमओ, सिविल अस्पताल, भिवानी

कार में सेंट्रल लॉक हो, तो वह आपके लॉक करने के बाद ही लॉक होती हैं। ऐसा होने पर सेंट्रल लॉक की रिमोट से ही खुलती भी है। यदि सेंट्रल लॉक न की गई हो, तो खिड़कियों को खोला जा सकता है। कई बार लोकल सेंट्रल लॉक लगे होने पर वाहन की खिड़कियां अपने आप लॉक हो जाती हैं। संभव है बच्चे कार में जाकर दरवाजे बंद कर लिए हों। वे खिड़कियां-दरवाजे खोलना न जानते हों। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी स्वाभाविक हो जाती है। साथ ही बंद कार अगर धूप में काफी देर खड़ी रहती है, तो वह बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है। ऐसे में मासूम की जान चली गई हो।'
-नवीन शर्मा, वर्कशॉप मैनेजर, भिवानी