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विभाग के चीफ सेक्रेटरी से अफसरों ने लगाई गुहार... बस इज्जत बचा लेना

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. हरियाणा का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग केंद्रीय योजनाओं के टारगेट पूरे करने में बुरी तरह पिछड़ गया है। केंद्र से विभाग के चीफ सेक्रेटरी प्रसन्न कुमार पिंचा जब राज्य में निशक्त लोगों के लिए चलाई गई योजनाओं की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे तो रिव्यू मीटिंग में अलग ही नजारा था।

अधिकारी उनसे गुहार लगाते दिखे। कहा-‘मीडिया के सामने ज्यादा पोल न खोलना। इज्जत बचा लेना।’ इससे नाराज केंद्रीय अधिकारी ने राज्य सरकार और अफसरों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने बताया कि योजना के लिए हरियाणा में कुछ भी नहीं हुआ है।

न बैठक होती न नीति बनती: उन्होंने बताया कि वें यहां निशक्त लोगों के कल्याण की योजनाओं का जायजा लेने आए थे। लेकिन यहां तो कुछ हुआ ही नहीं। हर राज्य में निशक्त लोगों के को-आर्डिनेशन कमेटी होती है। इसकी साल में दो बैठक होती है। यह नीति का ड्राफ्ट तैयार कर विधानसभा के पटल पर रखती है।

लेकिन हरियाणा में अभी तक विधानसभा के पटल पर यह रिपोर्ट रखी ही नहीं गई। इसी तरह से एक कार्यकारी समिति होनी चाहिए। इसकी तीन माह में एक बैठक होनी चाहिए। यहां मात्र 25 प्रतिशत बैठक हुई।

सिर्फ आंसू आने शेष थे, बाकी कोई कमी नहीं छोड़ी : प्रसन्न

प्रसन्न ने बताया कि वे सरकार और अधिकारियों के रवैये से इतने आहत थे कि कई मौकों पर रोने को हो गए। पहले तो राज्य सरकार ने बैठक दो बार टाल दी। जब वे यहां पहुंचे तो विभाग के चीफ सेक्रेटरी नहीं मिले। विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी तो बैठक में ही नहीं आए। किसी ने उनके साथ इस मुद्दे पर बात नहीं की। बैठक में मौजूद राज्य के कुछ अधिकारियों से मीडिया ने भी सवाल किए तो वे जवाब नहीं दे पाए।

क्या है अधिनियम

नि:शक्तजन अधिनियम-1995 के तहत इस श्रेणी के लोगों के कल्याण के लिए सरकार को योजना बनानी है। राज्य कार्यकारिणी समिति बनाकर ऐसी नीतियां तैयार करनी है। निशक्त भी आराम से सरकारी भवनों व अन्य जगह पर आवाजाही कर सके, इसके लिए रैंप आदि की व्यवस्था की जानी है। उनकी शिक्षा का उचित प्रबंध होना चाहिए।

ये है योजना का सच

बैकलॉग 1330 है। अभी इन पदों पर भर्ती नहीं हुई। 2005 में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निशक्त लोगों के लिए 26 स्कूल खोलने का आश्वासन दिया। लेकिन खुला एक भी नहीं। लापरवाही का आलम यह है कि जब राज्य से कुछ सवालों की जानकारी मांगी तो इसमें निशक्त लोगों के स्कूल के खाने में यहां से लिख कर दिया गया नॉट एप्लीकेबल।

26 स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। निदेशक मिशन की नियुक्ति होनी है। मामला सरकार के पास है। राज्य कार्यकारिणी समिति की 16 बैठकें हो चुकी हैं। राज्य समन्वय समिति एवं राज्य कार्यकारिणी समिति में गैर सरकारी सदस्यों के चयन का मसला उच्च अधिकारियों को भेजा गया है।

-प्रवक्ता, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग