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निगम चुनाव के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़/हिसार. पंचकूला, हिसार और करनाल में वार्डबंदी को चुनौती देने से संबंधित याचिकाओं के विचाराधीन रहते हुए प्रदेश सरकार द्वारा सात नगर निगमों के चुनाव की अधिसूचना जारी करने को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
सोमवार को हाईकोर्ट में दायर अलग-अलग अर्जी में कहा गया कि मुख्य याचिका पर सुनवाई 15 जुलाई को होनी है लेकिन इसी बीच सरकार ने 9 मई को अधिसूचना जारी कर दो जून को नगर निगम चुनाव कराने का फैसला ले लिया। यदि चुनाव पर रोक नहीं लगाई गई तो उनकी याचिका पर सुनवाई का कोई अर्थ नहीं रहेगा। इस अर्जी पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।
वार्डबंदी को लेकर फरवरी में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले हिसार के वार्ड-19 के पूर्व पार्षद पंकज दीवान और उनके वकील राजेश खंडेलवाल ने बताया कि हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत शर्मा सोमवार को छुट्टी पर थे इसलिए याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई।
उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को मामले की सुनवाई हो जाएगी। गौरतलब है कि दीवान व अन्य ने 16 जनवरी-2013 को जारी अधिसूचना को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। इस अधिसूचना के मुताबिक हिसार में वार्डबंदी वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक की गई जबकि यह 2011 की जनगणना के मुताबिक होनी चाहिए। याची की दलील थी कि 10 बरसों में जनसंख्या दस फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। पंचकूला म्यूनीसिपल कमेटी की पूर्व प्रधान सीमा चौधरी व इंद्रजीत सिंह और करनाल के गजे सिंह की तरफ से भी वार्डबंदी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
निगम चुनाव कई मायनों में अहम
चंडीगढ़ त्न दो जून को प्रस्तावित नगर निगम चुनाव प्रदेश के चारों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए कई मायनों में अहम हैं। कांग्रेस हालांकि पार्टी सिंबल पर इस चुनाव में नहीं उतर रही लेकिन उसके कई वरिष्ठ कार्यकर्ता चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए उतावले हैं। दूसरी इनेलो व भाजपा पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। हजकां ने बतौर पार्टी चुनाव से दूर रहने का फैसला किया है।
इनेलो : बहुत कुछ दांव पर
यह पहली दफा है जब इनेलो अपने सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला के बगैर चुनाव में उतरेगी। पार्टी की कमान अभय चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा के हाथ में हैं। अभय यदि बेहतर प्रदर्शन में सफल रहते हैं तो पार्टी दोगुने जोश के साथ कांग्रेस पर हमला कर सकेगी।
हजकां-भाजपा : दिशा तय होगी
भाजपा-हजकां का गठबंधन होने के बाद ये पहला चुनाव है लेकिन दोनों की राह अलग-अलग है। भाजपा जहां पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने जा रही है वहीं हजकां ने चुनाव में उतरने का फैसला कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया है। गठबंधन के प्रत्याशी एक-दूसरे को नुकसान न पहुंचाएं, ये कैसे तय होगा, कुछ स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस : पता चलेगा कहां खड़े हैं
पार्टी इन दिनों कार्यकर्ताओं के जबरदस्त असंतोष का सामना कर रही है। कांग्रेस बेशक सीधे तौर पर भले ही चुनाव में न उतरे लेकिन उसके कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन यह बता देगा कि पार्टी की पकड़ मतदाताओं पर बरकरार है या नहीं?