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एसबीपी के ऑनलाइन खाताधारक काट रहे चालान

8 वर्ष पहले
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हिसार. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी) के ऑनलाइन खाताधारकों को इन दिनों अच्छा खासा काम मिला हुआ है। यह काम है चालान भुगतान का। सरकारी नौकरी के लिए उमड़ रही युवाओं की भीड़ ने यह नया अवसर पैदा किया है। बैंकों के बाहर चालान भुगतान के लिए लगने वाली लंबी कतारों से बचने के नाम पर कुछ लोग सुविधा शुल्क के जरिए चांदी कूट रहे हैं।
शहर के एसबीपी शाखा से जुड़े कुछ लोग तकनीक से रुपये कमा रहे हैं। इसके लिए ऑन लाइन बैंकिंग को जरिया बनाया है। ऑनलाइन खाताधारकों ने एसबीपी की शाखाओं के आसपास ही अपने लेपटॉप और कम्प्यूटर सिस्टम लगाए हुए हैं। यहां आवेदकों को कतार नहीं लगानी पड़ती। करीब चार पांच लोग अलग अलग सिस्टम लेकर चालान भुगता रहे हैं।
शहर में ऐसे करीब डेढ़ काउंटर बन गए हैं। इसके लिए वे अपने खाते का प्रयोग कर रहे हैं। इस सुविधा के बदले हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से निर्धारित फीस के अलावा 20 से 50 रुपये शुल्क वसूला जा रहा है। बैंक के चालान काउंटर पर कतार में नहीं खड़े होने वाले उम्मीदवार वहां जा भी रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या कम है। ज्यादातर आवेदकों का विश्वास अब भी बैंक पर ही है।
आजाद नगर के अनिल ने बताया कि मैं एसबीपी बैंक का खाताधारक हूं। मेरे पास ऑन लाइन बैंकिंग सुविधा है। इसके जरिए ही लोगों के चालान फीस जमा करा रहा हूं। आवेदकों से शुल्क लेकर मैं अपने से भुगतान कर रहा हूं। इसके बदले 20 रुपये तत्काल शुल्क ले रहा हूं। लाइन में खड़े होने या समय की बचत करने वाले आवेदक हमारे पास आ रहे हैं।
कोई भी ऑन लाइन बैंकिंग सुविधा रखने वाला व्यक्ति चालान भुगत सकता है। इसके लिए आवेदकों को जरनल नंबर दिया जा रहा है। यही नंबर उनके चालान भुगतान की भी पुष्टि करता है। सरकार की ओर से एक ही बैंक को चालान जमा कराने की अनुमति देने के चलते आवेदकों की भीड़ बनी हुई है।
एसबीपी आजाद नगर शाखा प्रबंधक हरीश महता ने बताया कि बैंक ने अपने उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा दी हुई है। इससे कुछ लोग अपने साथ दूसरों के चालान भी जमा करा रहे हैं। बैंक की ओर से इस पर रोक नहीं है। वह उसकी निजी सोच है। कोई भी ग्राहक ऑन लाइन बैंकिंग सुविधा ले सकता है। अधिक शुल्क वसूलने को लेकर बैंक किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकता।