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ये हैं केजरीवाल के चचेरे भाई, जीत की खुशी में नांचे फिर बांटे लड्डू

6 वर्ष पहले
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हिसार। दिल्ली में “आप” की जीत पर शहरवासियों का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। अपने शहर के एक आम आदमी ने देश का दिल यानि दिल्ली फतह कर ली। अरविंद केजरीवाल की जीत पर शहर की सड़कों पर जश्न का माहौल दिखा। उधर, भिवानी के कस्बे सिवानी में घुसते ही जश्न सा माहौल दिखा। अनाज मंडी में आम आदमी भी आप की टोपी पहने दिखे। मंडी में बाकी दिनों से ज्यादा चहलकदमी।
एक छोटे से मकान के बाहर मीडिया के कर्मियों की भीड़। एक बुजुर्ग को देखते ही बाइट लेने की होड़। ये बुजुर्ग अरविंद केजरीवाल के चाचा गिरधारी लाल हैं। मीडिया कर्मियों ने उन्हें आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के बारे में कुरेदा। कमरे में सामने लगी एलसीडी पर दिल्ली के चुनावी नतीजे चल रहे थे। मंगलवार सुबह से ही गिरधारीलाल के घर में बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। वह अपने पूरे परिवार के साथ आम आदमी पार्टी की टोपी लगाकर टीवी के सामने बैठे रहे।

गिरधारी लाल बताते हैं कि केजरीवाल ने कहा था कि पहले दिल्ली फतह करूंगा उसके बाद देश की बारी आएगी। यह दावा केजरीवाल ने करीब 7 महीने पहले सिवानी आने पर किया था। वह अपने चाचा मुरारीलाल के निधन पर शोक जताने आए थे। उन्होंने सिवानी मंडी में रह रहे दूसरे चाचा गिरधारीलाल से चुनाव को लेकर चर्चा की थी।
अब गिरधारीलाल ने कहा कि धुन के पक्के केजरीवाल ने जो कहा-आज वह करके दिखा दिया। पूरी दिल्ली उनके साथ अा गई। ऐसा ही माहौल 29 दिसंबर, 2013 को सिवानी मंडी का था। तब अरविंद केजरीवाल पहली बार दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे। लेकिन इस बार खुशी कई गुणा बढ़ी है।
गिरधारीलाल का कहना है कि जिस तरह से दिल्ली की जनता ने केजरीवाल के प्रति इतना मोह दिखाया है अब उन्हें अपने किए गए वादों को पूरा करके दिल्ली की जनता का कर्ज उतारना होगा। दिल्ली के अप्रत्याशित नतीजे हैं। लाल को 44 से 45 सीटों की उम्मीद थी।
डीएन कॉलेज के होनहार छात्र रहे केजरी
अरविंद केजरीवाल सन 1984-85 में दयानंद कॉलेज के छात्र रहे। उन्होंने प्री इंजीनियरिंग की पढ़ाई यहां की थी। केजरीवाल ने 82.5 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में मेरिट में 7वां स्थान हासिल किया। यह जानकारी डीएन कॉलेज के प्रवक्ता सुशील राजपाल ने दी।
बास के पवन शर्मा भी बने
गांव के पवन शर्मा बने आदर्श नगर से विधायक
दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप पार्टी की जीत पर बास गांव में खुशी का माहौल है। दिल्ली आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से विजयी रहे आप पार्टी उम्मीदवार पवन शर्मा बास गांव से संबंध रखते है। उनका पैतृक गांव बास है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई व यहीं पर उनका बचपन बीता। वह करीब पंद्रह वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ दिल्ली चले गए। अब भी गांव में उनके बचपन के काफी दोस्त मौजूद है।

समाज सेवा करने वाले पवन शर्मा को आम आदमी पार्टी की टिकट पर आदर्श नगर से चुनाव लड़ने का मौका मिला। मंगलवार को घोषित परिणामों में पवन शर्मा ने भाजपा उम्मीदवार राम कृष्ण सिंगल को 20327 वोटों से हराया। शर्मा ने कुल 54026 वोट प्राप्त किए। उनकी जीत पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
गांव में ही रहने वाले उनके भाई सत्यवान, ईश्वर, रामू, रामबीर, जयबीर ने बताया की पिछले माह ही टिकट मिलने के बाद वह गांव में आए थे। वह पूजा करने के लिए परिवार सहित गांव आए थे। शर्मा के तीन एक लड़के सहित दो लड़किया है। उनके दो भाई है जो दिल्ली में ही रहते व वहीं पर उनका व्यापार है।
आरटीआई से मिला मैग्सेसे अवॉर्ड
आरटीआई बिल बेशक पिछली कांग्रेस सरकार ने लागू किया, मगर उसके लिए अलख जगाने का काम अरविंद और उनकी संस्था परिवर्तन ने किया। राइट टू इन्फॉरमेशन पर काम करने के लिए उन्हें एशिया का नोबेल पुरस्कार कहे जाने वाला मैग्सेसे अवार्ड मिला।
केजरीवाल का पहला नाम था किशन

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि केजरीवाल का पहला नाम किशन था। परिवार के बड़े बुजुर्ग उन्हें इसी नाम से पुकारते थे। केजरीवाल 16 अगस्त, 1968 को पैदा हुए थे। उस दिन जन्माष्टमी थी। इसी वजह से उन्हें पारिवारिक सदस्य किशन कहने लगे। उन दिनों केजरीवाल का अधिकांश परिवार खेड़ा गांव छोड़कर सिवानी की अनाज मंडी में शिफ्ट हो चुका था। आज भी मंडी में उनका घर है, जो बिलकुल सामान्य है।
दाल मिल मालिक थे अरविंद के दादा

1947 से पहले अरविंद के दादा मंगलचंद केजरीवाल खेड़ा गांव छोड़कर सिवानी मंडी में आकर बस गए थे। उन दिनों में सिवानी की दाल मंडी में मशहूर होती थी। मंगलचंद ने दाल मिल लगाई थी। उनके पांच बेटे थे। अरविंद के पिता गोविंदराम सबसे बड़े हैं। फिर मुरारीलाल, राधेश्याम, गिरधारीलाल और श्यामलाल। गोविंदराम ने पहले हिसार में जिंदल ग्रुप में काम किया और फिर देश के दूसरे शहरों में। अरविंद के चाचा राधेश्याम का सिक्किम में व्यापार है। राधेश्याम और गोविंदराम को छोड़कर बाकी तीनों भाइयों का परिवार मंडी में रहता है।
करीब दस साल पहले चले गए थे दिल्ली

पवन शर्मा करीब दस वर्ष पूर्व दिल्ली चले गए थे। वहां जाकर उन्होंने स्टील की फैक्ट्री लगा ली। कुछ समय बाद वह अपने माता पिता को भी दिल्ली ले गए। अपने पैतृक गांव बास में लगातार आते रहते है। गांव में उनके परिवार के काफी लोग रहते है। वह उनसे मिलने एक दो महीने में चक्कर लगाते रहते है।
आगे की स्लाइड में देखिए परिवार के जश्न की PHOTOS...