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एकमात्र टीबी अस्पताल में सुविधाएं ही नहीं, मायूस लौट रहे मरीज

7 वर्ष पहले
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हिसार। प्रदेश में केवल एक ही टीबी अस्पताल है वो भी हिसार में। यहां पर 20 से अधिक मरीजों को एक साथ भर्ती करने की भी सुविधा नहीं है। इसी के कारण मरीजों को भर्ती करने की बजाए दवा देकर फिर से आने के लिए कहा जाता है। इससे मरीज मायूस घर लौट रहे हैं। अस्पताल में हिसार, आसपास के जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब व राजस्थान से इलाज करवाने के लिए रोजाना करीब 150 मरीज आते हैं। यह टीबी अस्पताल वर्ष 1961 में बनकर तैयार हो गया था और मरीज आना शुरू हो गए थे। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि उन्होंने अस्पातल की अव्यवस्थाओं के बारे में सैकड़ों बार सिविल सर्जन और प्रशासन को अवगत कराया पर कार्रवाई नहीं की गई।
तीन ही वार्ड उसमें भी दो गिरने की कगार पर

टीबी अस्पताल में आने वाले मरीजों को दाखिल करने के लिए तीन वार्ड बनाएं गए थे। लेकिन कई सालों से दो वार्ड गिरने की कगार पर हैं। खतरा होने के कारण डॉक्टर मरीजों को भर्ती भी नहीं करते हैं। टीबी अस्पताल में चिकित्सकों ने बताया कि यहां पर रोजाना मरीजों की भारी भीड़ लगी रहती है। लेकिन यहां पर दो चिकित्सक नियुक्त हैं जिस हिसाब से यहां पर मरीज आते हैं उनको देखा जाए तो यहां पर कम से कम दस चिकित्सक होने चाहिए। इसके अलावा यहां पर चार स्वीपर और चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। मरीज के तीमारदारों को भी बाहर बैठने के जगह नहीं है। बड़ी बड़ी घास उगी होने के कारण जहरीले जंतुओं का खतरा है।
लावारिस पशुअाें का आतंक
टीबी अस्पताल में लावारिस पशु हमेशा घूमते नजर आते हैं। कई बार मरीजों को पशुओं ने दौड़ा भी लिया है। साफ सफाई न होने के कारण अस्पताल की छत पर बंदरों ने आशियाना बना लिया है। अस्पताल कर्मचारियों ने बताया कि यह बंदर कई लोगों को काट भी चुके हैं। टीबी अस्पताल में पार्क नहीं है।
अस्पताल की अव्यवस्थाओं के बारे में कई बार सिविल सर्जन और प्रशासन के आला अधिकारियों को लिखा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा
रही है।''
कुलदीप सिंधु, मेडिकल ऑफिसर, टीबी अस्पताल।
(फोटो- टीबी अस्पताल के बाहर मरीजों को बैठने तक की सुविधा नहीं है। बाहर घास पर बैठना पड़ रहा है।)