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खुद की सेफ्टी में जुटे डॉक्टर मरीज-अटेंडेंट भगवान भरोसे

6 वर्ष पहले
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हिसार। स्वाइन फ्लू के प्रकोप से बचने के लिए सिविल अस्पताल का स्टॉफ खुद की सेफ्टी में तो जुट गया है, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को किसी की परवाह नहीं है। ऐसा ही मामला शुक्रवार को सिविल अस्पताल में हुआ। स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध जांच के लिए आया। डॉक्टरों ने उसे आइसोलेशन वार्ड में रखने की बजाए इमरजेंसी में भर्ती कर दिया। संदिग्ध मरीज के भर्ती होते ही इमरजेंसी में कार्यरत स्टॉफ ने अपनी सेफ्टी के लिए तो तुरंत मास्क लगा लिए, लेकिन इमरजेंसी में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बारे में किसी ने चिंता नहीं की।
जबकि स्वाइन फ्लू एक ऐसा वायरस है जो कि एक मरीज से दूसरे में बहुत जल्द फैलता है। इमरजेंसी में भर्ती करने के बाद जांच के लिए सैंपल दिल्ली लैब में भेज दिया गया।जो संदिग्ध इमरजेंसी में भर्ती किया गया था उसमें वर्ष 2010 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। दोबारा से स्वाइन फ्लू की आशंका के कारण परिजन उन्हें सिविल अस्पताल लेकर अाए थे। जानकारी के अनुसार संदिग्ध मरीज एक प्रशासनिक अधिकारी है।

विडंबना यह है कि सिविल अस्पताल में फौरी तौर पर स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। लेकिन हालत ये है कि हिसार में 8 मामले पॉजिटिव आने के बावजूद आजतक किसी मरीज
को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती नहीं किया गया है।
अब तक लिए 91 सैंपल
प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर जारी अलर्ट के बाद सिविल अस्पताल में अभी तक स्वाइन फ्लू के 91 सैंपल जांच के दिल्ली लैब में भेजे गए है। इनमें शुक्रवार तक 76 की रिपोर्ट आई है। स्वाइन फ्लू के नोडल ऑफिसर सुशील गर्ग ने बताया कि भेजे गए सैंपल में से 62 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि 14 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
हिसार में मिले 8 पॉजिटिव केस
अभी तक मिले कुछ 14 पॉजिटिव मरीजों में 8 मरीज हिसार के हैं, जबकि 6 बाहरी जिले के हैं। इनमें सिरसा, भिवानी, हनुमानगढ़ सहित अन्य जिलों के मरीज शामिल हैं। नोडल ऑफिसर ने बताया कि हिसार के कुल आठ मरीजों में से 7 का उपचार घर पर ही चल रहा है, जबकि एक मरीज शहर के निजी अस्पताल में उपचाराधीन है। उसकी हालत में भी सुधार है।
इस तरह फैलता है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक वायरस है। एक व्यक्ति में फैलने के बाद उसके संपर्क में आने वाले अन्य लोगों में वायरस के फैलने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए स्वाइन फ्लू के मरीज को आमतौर पर आइसोलेशन वार्ड में ही भर्ती किया जाता है। साथ ही उससे अन्य परिजनों को बहुत कम मिलने दिया जाता है। घर भेजे जाने पर भी उसे तब तक अलग कमरे में रखा जाता है, जब तक वह स्वस्थ नहीं हो जाता।
वार्ड में जाने से पहले बरतें सावधानी
किसी भी व्यक्ति से मिले तो उसके बाद हाथ साबुन से जरूर धोएं।
{वार्ड में जाने से पहले मुंह पर कोई कपड़ा या मास्क लगाए।
अगर कोई स्वाइन फ्लू का मरीज वार्ड में आया है तो उसके आने के बाद उसके कमरे में सीधा न जाएं, पूरी तरह से तैयारी के बाद ही जाएं।
इन बातों का रखें हमेशा ध्यान
खांसी जुकाम हो तो मुंह पर रुमाल रखें।
{भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में मुंह पर कपड़ा रखें।
{मुंह पर कम हाथ लगाएं।
{हाथ को बार-बार साबुन से साफ करें।
{छींकते समय हमेशा अपनी नाक और मुंह पर कपड़ा रखे। इसके बाद हाथ जरूर धोएं।