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खाने को रोटी न पीने को लस्सी, खिचड़ी से चलाया जा रहा काम

8 वर्ष पहले
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हिसार. कर्मचारियों की हड़ताल ने आम आदमी के खाने का जायका तक बिगाड़ दिया है। किसी को रोटी नहीं मिल रही तो किसी को लस्सी। पानी भी कड़वा मिल रहा है। ऐसे हालत बनने की बड़ी वजह बिजली और पानी की सप्लाई तीन दिन से बाधित होना है। शहरों से ज्यादा गांवों में हालात खराब हैं। जिंदगी चलाने में अहम छोटे छोटे काम अटक गए हैं।
नारनौंद नगरपालिका की पूर्व चेयरमैन छन्नो देवी की सुनिए। उन्हें खाने के साथ लस्सी पसंद है।
वह बताती हैं कि पहले हाथ से दही बिलौने की आदत थी। अब नया जमाना है। मदाणी से दही को बिलौते हैं। बिना बिजली मदाणी चले कैसे और लस्सी बने कैसे। छन्नो देवी को लस्सी तो गांव सिवानी बोलान के शमशेर सिहाग को रोटी नसीब नहीं हो रही। वह बताते हैं कि सोमवार को आटा खत्म हो गया। चक्की पर गया तो पता चला कि बिजली गुल होने से चक्की ठप पड़ी है। अब गेहूं पिसेगा तो रोटी बनेगी। मगर पेट तो भरना ही है, सो बाजरे की खिचड़ी खाकर काम चला रहे हैं।
गांव नंगथला के हनुमान धीर पानी का स्वाद बिगडऩे से परेशान हैं। वह बताते हैं कि सप्लाई का पानी न मिलने से हैंडपंप का पानी पीना पड़ रहा है। जमीनी पानी का स्वाद खारा है। उन्होंने बताया कि बिजली बंद होने से जलघर से पानी की सप्लाई नहीं हो रही।दूसरे जलघर के कर्मचारी भी हड़ताल पर है। गांवों में लोग ट्रैक्टरों और बुग्गी से पानी ढो रहे हैं।
कैंट एरिया की हनुमान कॉलोनी निवासी जयलाल कस्वां की परेशानी भी जुदा नहीं है। वह बताते हैं कि सोमवार शाम को टॉवर वाली गली में तार टूटा था। पचास से ज्यादा बार फोन कर चुका। शिकायत केंद्र भी जाकर आ चुका। अभी तक लाइट ठीक नहीं हुई। दो दिन का दूध बिलौने से रह गया।