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नेक टू नेक: वो आखिरी चरण तक धड़कन बढ़ाने वाले मुकाबले

7 वर्ष पहले
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बात 1982 की है...साढौरा से भाजपा के भागमल कांग्रेस के प्रभुराम से मात्र दस वोट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। वोटों की गिनती के आखिरी चरण तक धड़कनें बढ़ाने वाली ऐसी सीटों पर हर बार सबकी नजर रहती है। मामूली अंतर से जीत वाली कुछ सीटों पर इस बार भी पुराने चेहरे ही आमने-सामने हैं।
पिछले चुनाव के नजदीकी मुकाबले इस चुनाव में भी प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। दरअसल, चंद वोटों से जीते प्रत्याशियों को मालूम है कि जीत तो गए थे, लेकिन हारते-हारते मुश्किल से बचे। वहीं, हारे हुए प्रत्याशी को लग रहा है कि पिछली बार जहां कमी रही उसे दूर कर देंगे। भले ही इस बार जीत का दावा कर रहे हों, पर एक-एक वोट के लिए पसीना बहा रहे हैं।
विधानसभा के पिछले चुनाव में 17 सीटों पर जीत का अंतर 3000 से कम रहा। 12 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वियों से हारे, वहीं इनेलो के 9 प्रत्याशी जीतने में कामयाब हुए थे। भाजपा के 4 में से 3 विधायक कम अंतर से जीत पाए थे। इनमें ितगांव से कृष्णपाल गुर्जर, भिवानी से घनश्याम सर्राफ और सोनीपत से कविता जैन के नाम शािमल हैं।
एक हलका ऐसा भी तीन बार न्यूनतम वोट से जीत
घरौंडा में 1968 में बीजेएस पार्टी के रणधीर सिंह ने एसडब्ल्यूए के रूलेराम को मात्र 12 वोट से, 1996 में भाजपा के रमेश ने समता पार्टी के जगपाल सिंह को 11 वोट से और 2005 के चुनाव में इनेलो की रेखा राणा ने आजाद उम्मीदवार जयपाल शर्मा को महज 21 वोटों से हराया था।
2009 में यहां हुईं कांटे की टक्कर
> 621-वोटों से जीते थे उचाना से ओमप्रकाश चौटाला
> 145- वोटों से जीते थे दादरी से सतपाल सांगवान
> 505- वोटों से जीते थे सोहना से धर्मवीर
इनके अलावा लोहारू से धर्मपाल ओबरा 623, बाढ़डा से रघुबीर छिल्लर 709, अटेली से अनीता यादव 973 और तिगांव से कृष्णपाल गुर्जर 818 वोटों से जीते थे।
इस बार हालात वही चेहरे लड़ सकते हैं
उचाना कलां : भाजपा नेता बीरेंद्र सिंह ने खुद चुनाव लड़ने की बजाय अपनी पत्नी प्रेमलता को मैदान में उतारा है। वहीं, इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला की गैर मौजूदगी में सीट को लेकर कशमकश की स्थिति है। पार्टी के पास दो विकल्प हैं। पहला, पूर्व सीएम चौटाला की पत्नी मैदान में आएं या फिर उनके पोते एवं हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला को भेजा जाए। लोकसभा चुनाव में दुष्यंत को उचाना से सबसे बड़ी लीड भी मिली थी। दोनों ही स्थिति में यह सीट प्रदेश की हॉट सीट बनने वाली है। प्रदेश के दो बड़े दो जाट परिवार फिर से आमने सामने होंगे।
दादरी : हजकां के टिकट पर चुनाव जीत कर कांग्रेस के पाले में गए सतपाल सांगवान और इनेलो के राजदीप फोगाट में फिर से मुकाबला तय है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर तीसरे नंबर पर रहे मेजर नृपेंद्र सिंह भाजपा से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में वह रविवार को अपनी नई रणनीति का ऐलान कर सकते हैं।
लोहारू : जीत के बावजूद इनेलो ने इस सीट से धर्मपाल ओबरा की जगह पर बड़वा गांव के ओमप्रकाश गौरा को टिकट दिया है। श्योराण खाप के वर्चस्व वाली बाढ़डा सीट पर बाकी दलों ने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। भाजपा में हाल ही शामिल हुए जेपी दलाल और पूर्व शिक्षा मंत्री बहादुर सिंह में से एक को टिकट मिल सकता है। पिछली बार दलाल दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के सोमबीर सिंह को दोबारा टिकट मिल सकता है, हालांकि मंत्री किरण चौधरी ने अपनी बेटी श्रुति चौधरी के लिए दावेदारी करके सभी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
बाढड़ा : कर्नल रघुबीर छिल्लर एक बार फिर इनेलो के टिकट पर मैदान में हैं। अन्य किसी दल ने अभी यहां पर टिकट की घोषणा नहीं की है। रणबीर महेंद्रा एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वह पिछले डेढ़ महीने से हलके में सक्रिय हैं। भाजपा से सुखविंद्र मांडी के अलावा नृपेंद्र सिंह अाैर सत्यवार शास्त्री टिकट की जुगत में हैं।