हिसार. मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का एक बयान विवादों में आ गया है। सीएम ने कहा है कि चुनाव से भागने वाले बारात के घोड़े होते हैं, रेस के नहीं। राजनीतिक हलकों में उनके बयान को पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैजला का राज्यसभा के लिए नामांकन से जोड़कर देखा जा रहा है। सैलजा के समर्थक विधायक नरेश सेलवाल ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा तक मांग लिया है। इस विषय को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री व जिलाध्यक्ष जयप्रकाश से गुरुवार को कांग्रेस भवन में सवाल जवाब हुए।
-सवाल : दो तरह के घोड़े को लेकर सीएम क्या कहना
चाहते थे?
-जवाब : मुख्यमंत्री का इशारा किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं था। उनकी बात को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। दरअसल,
राहुल गांधी ने एक संदेश दिया है। दो तरह के घोड़े होते हैं। एक दूल्हे के रथ को खींचने वाला और दूसरा रेस में दौड़ने वाला। मतलब साफ है। राजनीति में चुनाव लड़ना ही काम नहीं होता। पार्टी के लिए प्रचार करना भी अहम है।
-सवाल : क्या राज्यसभा में जाने वाले शादी के घोड़े होते हैं?
-जवाब : बात यह नहीं है कि कौन से राज्यसभा में जाते हैं और कौन से लोकसभा में। जो राहुल के नए सिस्टम पर खरा उतरेंगे, वह रेस में जाएंगे। वैसे मैं खुद रेस में दौड़ने वाला घोड़ा हूं। (जयप्रकाश ने सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया ।
-सवाल : सीएम से इस्तीफे की मांग पर क्या कहेंगे?
-जवाब : यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। इसे लेकर मीडिया में प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं। उचित मंच पर यह बात उठाई जाएगी। वैसे ऐसी भाषा का कांग्रेस में इस्तेमाल नहीं होता।
-सवाल : क्या जिले में घोड़े छांटें जाएंगे
-जवाब : राहुल चाहते हैं कि फील्ड में काम करने वाले को प्रोत्साहन मिले। मेहनतकश कार्यकर्ताओं को पार्टी आगे बढ़ाना चाहती है। जिले में ऐसे कार्यकर्ता छांटे जाएंगे, जो रेस जीतने में काबिल है।
-सवाल : क्या सैलजा प्रदेशाध्यक्ष बन रही है?
-जवाब : प्रदेशाध्यक्ष के मुद्दे पर पार्टी की पीसीसी ने हाईकमान को लिखकर दे दिया है। फिलहाल मुलाना अध्यक्ष है, हम उनके साथ है। आगे कौन होगा, पता नहीं। मगर जो भी होगा, उसका साथ देंगे।
-सवाल : सरकार के प्रोजेक्ट का विरोध क्यों है?
-जवाब : यह पार्टियों से प्रेरित है। गंगवा में विरोध की वजह राजनीति थी। जहां तक सातरोड जलघर की बात है तो जैसे ही सीएम को पता चला, उन्होंने पत्थर रखने से मना कर दिया। सीएम किसी भी विवादित जमीन पर पत्थर नहीं रखते।
घोड़ेला और उपायुक्त विवाद का पता नहीं
जयप्रकाश ने एक सवाल के जवाब में अफसरशाही हावी होने से साफ इंकार किया। कहा, अफसरशाही बेलगाम नहीं है। कोई भी अधिकारी किसी विधायक से तो दूर, कार्यकर्ता को भी अपमानित नहीं कर सकता। वैसे विधायक रामनिवास घोड़ेला और उपायुक्त एमएल कौशिक के बीच क्या बात हुई है, उपायुक्त ने उनसे क्या कहा, उन्हें कुछ पता नहीं है।