हिसार. हरियाणा के तीनों लालों की कर्मभूमि रहे हिसार, भिवानी व सिरसा जिलों में इस बार लालों के लाल चुनावी चक्रव्यूह में पसीना बहा रहे हैं। बड़ी चुनौती खुद को साबित करने की है। ताऊ देवीलाल की तो चौथी पीढ़ी के चार युवा दुष्यंंत, दिग्विजय, कर्ण और अर्जुन दिन रात एक किए हुए हैं।
लोकसभा चुनाव में हिसार व सिरसा सीट से विजय के बाद इनेलो का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। पार्टी ने सबसे पहले टिकट घोषित किए। पिछले चुनाव में हिसार की सात में से सिर्फ नारनौंद सीट ही पार्टी के खाते में आई थी। इस बार पार्टी की कोशिश कम से कम चार सीटें जीतने की है। इसके लिए पार्टी ने पहली बार गैर जाट उम्मीदवारों पर दांव भी खेला है। सिरसा की पांच में चार सीटों पर पिछली बार इनेलो व अकाली दल के उम्मीदवार जीते थे। पार्टी इस बार पांचों सीटों को हासिल करना चाहती है। सिरसा सीट पर बिल्डर मक्खन लाल सिंगला को पार्टी ने गोपाल कांडा के सामने उतारा है। पहली बार इनेलो चौटाला परिवार की किसी महिला को चुनाव मैदान में उतारने जा रहा है। डबवाली से दुष्यंत की माता नैना चौटाला का पार्टी प्रत्याशी बनना लगभग तय है। ऐलनाबाद से खुद अभय चौटाला मैदान में हैं। भिवानी में लोहारू और बाढड़ा सीटें अब तक इनेलो के पास थीं, लेकिन इस बार उसे दोनों ही सीटों पर चुनौती की सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बवानीखेडा व दादरी में पार्टी की उम्मीदें पहले से बेहतर हैं। फतेहाबाद की तीनों ही सीटों पर इनेलो मुकाबले में नजर आ रही है।
चौधरी भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस को भाजपा से अलग होने के बाद कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कुलदीप का गढ़ आदमपुर पूरी तरह से सुरक्षित लगता है। पार्टी हिसार की कम से कम चार सीटों पर बाकी दलों को कड़ी चुनौती दे रही है। सिरसा में पार्टी के पास दमदार उम्मीदवारों का अभाव है। फतेहाबाद शहर सीट पर पार्टी का दमखम दिख रहा है। कुलदीप के दोनों बेटे भव्य व चैतन्यी के साथ ही रेणुका बिश्नोई ने पार्टी के प्रचार को धार दी हुई है। भिवानी से सांसद रह चुके कुलदीप के पास कुछ सीटों को छोड दें तो जिले में कद्दावर नेताओं की कमी है। हालांकि पिछली बार दादरी सीट जीतने वाली हजकां यहां पर अपना स्कोर बढ़ाना चाहती है। हजकां की नजर ऐसे नेताओं पर है जिन्हें कांग्रेस या भाजपा का टिकट नहीं मिल पाया है। यही वजह है कि अभी तक पार्टी ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। चौधरी बंसीलाल के पुत्र रणबीर महेन्द्रा एक बार फिर कांग्रेस की सीट पर बाढड़ा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्हें कांग्रेस के टिकट घोषित होने का इंतजार है। पिछली बार मामूली अंतर से हारे महेन्द्रा को इस बार हालात बदलने का भरोसा है। चौधरी बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी का तोशाम से चुनाव लड़ना तय है। उनकी कोशिश इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की है। वे इसके लिए मंत्री के रूप में कराए गए अपने कामों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। बंसीलाल की दोहती श्रुति चौधरी लोकसभा का चुनाव हारने के बाद लोहारू से कांग्रेस का टिकट मांग रही हैं। उनकी दावेदारी से इस सीट के समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। पार्टी के भीतर इस सीट के एक अन्य दावेदार बंसीलाल के दामाद चौधरी सोमवीर सिंह हैं। वे पिछला चुनाव हार गए थे, इसके बावजूद हलके में उनका प्रभाव है।
अगर लालों को छोड़कर कांग्रेस व भाजपा की बात करें तो कांग्रेस को दस सालों के सत्ता विरोधी रुझान का सामना जरूर करना पड़ रहा है, पर पार्टी को भिवानी में बढ़त मिल सकती है। हिसार की सात में से चार सीटें जीतने वाली कांग्रेस को यहां झटका लग सकता है। हिसार, नलवा, बरवाला व उकलाना में पार्टी को विपक्ष से चुनौती मिल रही है। सावित्री जिंदल को पहली बार अपनी सीट बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सिरसा व फतेहाबाद में पार्टी के प्रत्याशी घोषित होने के बाद ही स्थिति साफ होगी। हालांकि फतेहाबाद की टोहाना सीट पर मंत्री परमवीर सिंह के सामने इनेलो के निशान सिंह और निर्दलीय देवेन्द्र बबली चुनौती पेश कर रहे हैं। रतिया में जनरैल सिंह को उपचुनाव में किए वादे पूरे न होने से मुश्किल आ सकती है।
भाजपा के पास चारों जिलों में खोने के लिए कुछ नहीं
पिछले चुनाव में भाजपा के टिकट पर भिवानी शहर से जीते घनश्याम सर्राफ फिर मुकाबले में हैं। जिले की दादरी और बाढड़ा सीट पर पार्टी के उम्मीदवार अन्य दलों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। हिसार में सिटी सीट पर कमल गुप्ता माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शहर के प्रमुख गोयनका परिवार का समर्थन मिलने से उनके अभियान को बल मिला है। नारनौंद में कैप्टन अभिमन्यु इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। हलके के खांडा गांव मे मूल निवासी अभिमन्यु के सामने पिछली बार की तरह ही इनेलो के राजसिंह मोर व निर्दलीय रामकुमार गौतम मजबूती से खड़े हैं। सिरसा में पार्टी ने पूर्व मंत्री लक्ष्मणदास अरोड़ा की पुत्री पर दांव लगाया है। ऐलनाबाद ने इनेलो छोड़कर आए पवन बेनीवाल को टिकट देकर भाजपा ने अभय चौटाला को चुनौती दी है। (लेखक हिसार के स्थानीय संपादक हैं।)