हिसार. सातरोड जलघर का विवाद एसपी मितेश जैन की विदाई में एक अहम कारण बना। अपने आगमन से पहले शहर में आगजनी और तोडफ़ोड़ की बात सुनकर मुख्यमंत्री पहले से गुस्से में पहुंचे थे, ऊपर से रही सही कसर स्थानीय नेताओं ने निकाल दी। नतीजन, महज पंद्रह दिन के भीतर जैन की हिसार से रवानगी हो गई। दरअसल, सातरोड जलघर को बनाने के खिलाफ चल रहे आंदोलन को शासन और प्रशासन ने हलके में लिया था। एक दिन पहले तो आंदोलनकारियों ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री का रास्ता रोकने और काले झंडे दिखाने का ऐलान कर दिया था। फिर भी पुलिस और प्रशासन सातरोड में उफनते गुस्से को शांत करने में नाकाम रहा। 28 जनवरी को मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले जब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सड़कों पर उग्र आंदोलन नजर आया तो उनकी पूरी नींद खुली।
तभी एक दूसरे की कमियां भी निकाली जाने लगी। उपायुक्त एमएल कौशिक ने तो क्षेत्रीय विधायक रामनिवास घोड़ेला को ही सार्वजनिक तौर पर जिम्मेदार ठहरा दिया। ऐसा करके उपायुक्त ने अपना पल्ला झाड़ने में कुछ हद तक कामयाब रहे, मगर एसपी मितेश जैन अपने बचाव में कोई ठोस वजह पेश नहीं कर पाए। सूत्रों के अनुसार सातरोड में उग्र आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री ने हिसार पहुंचने से पहले ही सीआईडी से रिपोर्ट ले ली थी। सीआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस त्वरित फैसले नहीं ले पाई, जिससे एसपी जैन की असक्षमता साबित हुई। तभी मुख्यमंत्री ने एसपी जैन के साथ साथ उपायुक्त कौशिक को भी खरी खरी सुनाई। मुख्यमंत्री के आक्रामक तेवर को देखकर उन नेताओं ने भी अपनी कसर निकाल ली, जो एसपी जैन की कार्यशैली से खुश नहीं थे।
कौशिक से हुई थी बहस
जैन की विदाई से डीसी एमएल कौशिक ने भी ठंडी सांस ली है। जैन और कौशिक आपस में बेहतर सामंजस्य नहीं बना पाए थे। कर्मचारी हड़ताल के दौरान उनके बीच खटास उभर आई थी। रोडवेज के चक्का जाम से अगले दिन दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस भी हुई। यह बात चंडीगढ़ मुख्यालय तक भी पहुंची। 13 का आंकड़ा भी सीएम के दौरे से एक दिन पहले डीसी कौशिक ने बात बात में कहा था कि तेरह का अंक ठीक नहीं। दरअसल, सीएम को तेरह प्रोजेक्ट का शिलान्यास व उद्घाटन करना था। तब कौशिक ने सामान्य लहजे में कहा था कि एक प्रोजेक्ट कम या ज्यादा कर लेते। आखिरकार उग्र आंदोलन के बाद सातरोड जलघर के शिलान्यास टालना पड़ा। दूसरी तरफ 13 जनवरी को होकर हिसार आए एसपी जैन की बदली हो गई।