हिसार। आठ साल की जिया अब खुश है। अपनों के पास पहुंच चुकी है। बारह साल का शिवन अब भी विचलित है। उसे अपने
बाबा रामपाल का इंतजार है। ये दोनों बरवाला के सतलोक आश्रम पर पुलिस ऑपरेशन के बाद अपनों से बिछड़ गए थे। पुलिस ने 20 नवंबर को चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के जरिये कैमरी रोड स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी बाल आश्रम पहुंचाया था। जिया को तलाशते हुए उसके पिता भरतदास आश्रम पहुंचे और प्रमाण देने के बाद साथ छत्तीसगढ़ ले गए। शिवन वापस नेपाल नहीं जाना चाहता, हालांकि पुलिस परिचितों को खोज चुकी है।
पिता बोला : भगदड़ में गोद से गिर गई थी जिया
छत्तीसगढ़ की तहसील जंजीर चंपारण के गांव कुशमुल निवासी भरतदास ने बताया कि वह 3 नवंबर को अपनी पत्नी व तीनों बच्चों के साथ सतलोक आश्रम आया था। उनके साथ चचेरा भाई व उसकी पत्नी भी आए थे। 18 नवंबर को पुलिस फोर्स जब आश्रम पहुंची तो महिलाएं दरवाजे के बाहर बैठी थीं। जिया अपनी चाची छटभई की गोद में थी। वह खुद आश्रम के भीतर था। पुलिस ने जब आश्रम के बाहर से भीड़ काे खदेड़ा तो जिया गोदी से गिर गई। इसी दौरान पुलिस ने लोगों को बस में चढ़ाकर बरवाला थाना भेज दिया। वह भी आश्रम से निकल गया। बरवाला थाना पहुंचने के बाद वह बच्ची को ढूंढ़ता रहा। वह बेटी को तलाशने वापस आश्रम जा नहीं सकता था। कुछ दिन बाद उसे पता चला कि जिया कैमरी रोड श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम है। पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी की मदद से उसे बेटी वापस मिली।
भरतदास बोले : समझो अब मन हट गया
पावर प्लांट में कार्यरत भरतदास ने बताया कि वह 2013 में संत रामपाल का अनुयायी बना था। तब से छह बार सतलोक आश्रम आ चुका है। इस घटनाक्रम के बाद समझो कि अब मन हट गया है। वैसे छत्तीसगढ़ में आज भी बाबा के काफी संख्या में अनुयायी हैं, जिनका विश्वास बरकरार है।
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