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गजुटा के प्रधान व सचिव में वर्चस्व की जंग और तेज, लग रहे आरोप

7 वर्ष पहले
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हिसार। गजुटा (गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय टीचर एसोसिएशन) में वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। एसोसिएशन के प्रधान ने सचिव पर मनमाने तरीके से काम करने और शिक्षकों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। जबकि सचिव ने प्रधान पर शिक्षकों के हितों के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन की कठपुतली बताया है। सचिव ने 16 सितंबर को होने वाली जनरल बॉडी की मीटिंग में चुनाव का कार्यक्रम तय करने का ऐलान किया है।
गजुटा की एक वर्ष पूर्व हुई चुनाव की जंग सड़क पर आ गई है। संगठन के दो धड़े आपस में तीखे शब्दबाण छोड़ रहे हैं। विश्वविद्यालय सूत्र कहते हैं कि बीते साल चुनाव के दौरान हुआ मनमुटाव एक बार फिर बढ़ गया है। इसी का आलम है कि प्रधान पर शिक्षकों के विरोध में काम करने का दूसरे गुट ने अारोप लगाया है।

हालांकि निलंबन से बेफिक्र सचिव ने जनरल बॉडी की मीटिंग में चुनाव की तारीख घोषित करने के अलावा चुनाव अधिकारी भी चुनने का फैसला लेने की बात कही। कहा कि अधिकतर पदाधिकारी हमारे फेवर में हैं तो निलंबन का औचित्य क्या? जबकि प्रधान सचिव और उनके साथियों पर संगठन को हाईजेक करने का आरोप लगाया है।
यह है मामला
सचिव डाॅ. संजीव कुमार ने बताया कि 10 सितंबर को सलाहकार परिषद की बैठक हुई थी। इस बैठक में कुल 11 में से आठ सदस्य मौजूद थे, जबकि एक सदस्य हमारे फोन से संपर्क में रहे। बैठक से प्रधान और संगठन के एक अन्य सदस्य गैर हाजिर रहे। उस बैठक में फैसला लिया था कि 16 सितंबर को जनरल बॉडी की बैठक कराई जाए, जिसमें चुनाव कराने और चुनाव अधिकारी तय करने पर फैसला लिया जाएगा। वहीं, प्रधान ने सूचना दिए बगैर बैठक कराने का आरोप लगाया है।
अपने-अपने तर्क
सचिव और उनसे कई पदाधिकारी शिक्षकों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। पर्यावरण विभाग में हुए करोड़ों रुपयों के घोटाले की जांच विजिलेंस कर रही है, उस घोटाले पर पर्दा डालने के लिए यह सभी संदेश देना चाहते हैं कि एसोसिएशन में हमारा दखल है। इसलिए मैंने सचिव और उप प्रधान को तीन वर्ष के निलंबित किया।''
डाॅ. एनएस मलिक, प्रधान, गजुटा
शिक्षकों के हक की लड़ाई में अक्सर पीछे रहने वाले प्रधान को अब कुर्सी जाने का खतरा है। यही कारण है कि वे चुनाव को डिले करना चाहते हैं। रही बात मेरे व उप प्रधान के निलंबन की तो दो तिहाई बहुमत मिले बिना इसका कोई औचित्य नहीं बनता। प्रधान तो मुझे छह माह पूर्व भी निलंबित कर चुके हैं।''
डाॅ. संजीव कुमार, सचिव, गजुटा
यह गजुटा का अंदरूनी मामला है, इसलिए मैं इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हां, इतना जरूर कहूंगा कि शिक्षकों के हितों के लिए आक्षेपों के बजाय दोनों पक्षों को उनके हितों के लिए काम करना चाहिए।''
डॉ. विकास वर्मा, प्रधान, गजूस्ठा।