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आचार संहिता से रुका काम, लापरवाही न होती तो प्रस्तावित योजनाएं न रुकतीं

7 वर्ष पहले
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हिसार। विधानसभा चुनाव की तारीख तय होते ही तमाम प्रस्तावित योजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई हैं। कई बड़ी योजनाओं को पूरा कराने में लापरवाही बरती गई, जबकि तमाम बड़ी योजनाएं धीमी रफ्तार की भेंट चढ़ गई। अब नई सरकार के गठन के बाद ही योजनाएं रफ्तार पकड़ सकेंगी। कई ऐसे बड़े मामले हैं जिनसे चुनाव के बाद जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। शहर के विकास के लिए कई योजनाएं प्रगति पर हैं।
लापरवाही की भेंट चढ़ी इन कई योजनाओं के क्रियान्वयन मेंं शिथिलता के चलते कार्य पूरा कराने की लागत बढ़ने का अंदेशा है। जनता का दर्द है कि जो योजनाएं अर्से पूर्व पूरी होनी थीं, उनकी पैरवी समय से हो जाती तो विकास की रफ्तार और तेज होती। शहर के निवासियों का कहना है यदि नगर निगम तेजी से काम करता तो जो विकास की परियोजाएं हैं वह आचार संहिता लगने से पहले की हो चुकी होती।
लापरवाही ने बिगाड़ी रफ्तार
साउथ बाइपास : 32 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन करीब 21.49 किमी लंबे साउथ बाइपास पर 21 सितंबर 2011 से काम शुरू हुआ था। पहले 20 सितंबर 2013 को काम पूरा होना था। अड़चनों के चलते 30 जून 2014 से लेकर अब 30 नवंबर 2014 को काम पूरा होने की अंतिम तिथि। हालांकि काम की धीमी रफ्तार को देखते हुए 2015 से पहले जनता को बाइपास का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं।

सीवर व पेयजल आपूर्ति: जरा सी बरसात में शहर तालाब बन जाता है। इसलिए जल निकासी के लिए सीवर बिछाए जा रहे हैं। जबकि गंदे पानी और तमाम कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति से निजात दिलाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग तेजी से काम नहीं करा पाया। शहर के कई हिस्से खुदे पड़े हैं।
डेयरी शिफ्टिंग: शहर में करीब 265 से अधिक डेयरियां संचालित हैं। शहर के बीच में डेयरी होने से एक तो दुधारू पशुओं को लोग छोड़ देते हैं। जबकि अवैध कनेक्शन करके सीवरों में गंदगी और कीचड़ डालने से यह डेयरी संचालक सीवरों को बंद कर देते हैं। 12 वर्ष पुरानी समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस इंतजाम नहीं कर सका। क्योंकि डेयरी शिफ्टिंग के लिए रणनीति अभी निगम तय नहीं कर सका।

22 चिकित्सकों का टोटा नहीं हुआ खत्म: सामान्य अस्पताल के अधिकारी कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं संवारने के लिए शासन तक पैरवी हुई। लेकिन चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी। चूंकि यहां 44 में से महज 22 चिकित्सक ही फिलहाल तैनात हैं।
इन कामों के रुकने से जनता ज्यादा परेशान
सीसीटीवी कैमरे: शहर में सीसीटीवी कैमरे लगने का काम अब चुनाव बाद ही पूरा हो सकेगा। चूंकि नगर निगम और पुलिस संयुक्त रूप से कैमरे लगने वाले स्थलों को चिन्हित करके फाइल डीसी की मंजूरी का इंतजार।
डाबड़ा ओवर ब्रिज: सभी राजनीतिक दल चुनाव में डाबड़ा चौक के दोहरीकरण के मामले को उठाने को तैयार हैं। करीब 39 करोड़ की लागत से प्रस्तावित इस दोहरीकण का काम अटकने से जनता टेंशन में है।
वार्डों में पार्षदों के ऑफिस: शिकायतों का निस्तारण कराने के लिए निगम दफ्तर में चक्कर न काटने पड़े इसके लिए सभी वार्डों में पार्षदों के ऑफिस खोले जाने थे। फिलहाल निगम के प्रस्ताव में यह बिंदु शामिल, चुनाव के बाद के एजेंडे पर मुहर लगने की उम्मीद।
सूर्य नगर व पटेल नगर अंडर पास: सूर्य नगर अंडर पास का मामला निगम की बैठक के एजेंडे में शामिल था, चर्चा नहीं हुई। इसलिए चुनाव बाद ही इस पर कुछ काम होगा। पटेल नगर में फिलहाल 100 मीटर के दायरे में दो आरयूबी के प्रस्तावों में जनता विरोध कर रही है।
इनपर लोगों को उम्मीद
लावारिस पशुओं के लिए अस्थायी बाडा: धान्सू रोड पर 25 लाख से अस्थायी बाड़ा निर्मित होने का काम शुरू। इस आठ एकड़ के बाड़े में लावारिस पशु पकड़कर रखे जाने हैं। कुछ ऐसी ही प्रक्रिया ढंढ़ूर के डंपिंग स्टेशन काे शिफ्ट करने के लिए चल रही है।

सात रोड वासियों को नसीब होगी छत: सात रोड में 63 करोड़ की लागत से कुल 1508 आवास गरीबों को मिलने हैं। आवेदनों की क्रॉस चेकिंग हो रही है। ऐसे ही करीब 48 करोड़ की लागत से धोबीघाट पर प्रस्तावित शापिंग कॉम्प्लेक्स की राह आसान हो जाएगी।

चुनाव बाद सीएससी दिलाएगा टेंशन से निजात: निगम में एक छत के नीचे सर्टिफिकेट से लेकर समस्याओं का निस्तारण का निगम की नई बिल्डिंग में मिलेगा। यहां सिटीजन सर्विस सेंटर पर तेजी से काम चल रहा है।

अवैध कॉलोनियों को नियमित करना: अवैध कॉलोनियों काे नियमित करने की सरकार ने घोषणा बीते वर्ष की थी। निगम ने शहर की 13 कॉलोनियों का सर्वे किया जा चुका है। चुनाव के बाद इन कॉलोनियों के हजारों लोगों को कॉलोनियां नियमित होने की उम्मीद है।

लुवास की अपनी होगी जमीन: लुवास भविष्य में अपनी इमारत में संचालित होने की उम्मीद बढ़ गई हैं। प्रशासनिक सूत्र कहते हैं कि चंडीगढ़ रोड पर करीब 300 एकड़ जमीन मिल चुकी है। करोड़ों की लागत से लुवास की अपनी बिल्डिंग बनने के आसार तेज हो गए हैं।