मौजिज लोगों की समिति रखेगी पंचायती काम पर निगरानी
शिक्षाकी शर्त लागू करने के बाद प्रदेश सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। ‘गांवों की सरकार’ में अब सोशल ऑडिट सिस्टम लागू किया जाएगा। यह घोषणा शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के प्रदेश स्तरीय शपथ ग्रहण समारोह में की।
पंचायतों में सोशल ऑडिट सिस्टम के तहत गांव की सरकार की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाएगा और कार्यों में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि समितियों के जरिए भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाएगी और एक समान कार्य होंगे। समितियों के गठन के बाद भेदभावपूर्ण तरीके से कराए जाने वाले कामों पर भी रोक लग जाएगी।
बनाईजाएंगी समितियां: सोशलऑडिट सिस्टम के तहत 5 से 11 लोगों की समितियां बनाई जाएंगी। पंचायत के लिए गांव से और जिला परिषद, पंचायत समिति पंचों के लिए वार्डों से लोगों को इन समितियों में शामिल किया जाएगा। समिति के सदस्यों का चयन भी देखभाल कर किया जाएगा। इसके लिए सीएम ने आदर्श व्यक्तियों के चयन की बात कही है। समिति सदस्य बनने के लिए भी नो ड्यूज जैसी शर्त लगाई जा सकती है।
येकाम करेंगी समितियां: समितियाेंका मुख्य काम पंचायतों, जिला परिषदों, पंचायत समितियों या पंचों के वार्डों के लिए किए जाने वाले कामों की समीक्षा करना है। कहीं काम नहीं हो रहे, या कहीं भेदभाव किया जा रहा है। सरकार की ओर से विभिन्न कामों के लिए आने वाली ग्रांट का सही प्रयोग कैसे हो रहा है, कहीं भ्रष्टाचार के संकेत हैं। इस पर समितियों के सदस्य निगाह रखेंगे।
कईराज्यों में पहले ही यह व्यवस्था: उत्तरप्रदेश, हिमाचल और मध्य प्रदेश सरीखे कई राज्यों में पहले ही महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) जैसी योजना में सोशल ऑडिट की व्यवस्था है।
जिलापरिषद के हवाले गौ अभ्यारण : कृषिएवं पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि गौ अभयारण्य का निर्माण जिला परिषद करेंगी। अब अंगूठा लगाने वाले नहीं उठाने वाले प्रतिनिधि चुने गए हैं। ये गांव की मिनी सरकार हैं। कॉलेज के हाॅस्टल से गांवों में आकर प्रतिनिधि चुने गए हैं। अब पंचायत समिति एवं जिला परिषद के काम बढ़ाए जाएंगे।