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पाबंदी : सरहद पार नहीं जा रहीं बसें

7 वर्ष पहले
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(करनाल . बस से यमुना पुल के इस तरफ उतर कर यूपी की तरफ पैदल जाते यात्री।)
करनाल। आजकल यूपी-हरियाणा सीमा पर अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है। करनाल से मेरठ और करनाल से शामली रोडवेज बसों का आवागमन ठप है। तो यूपी की बसें यहां आती है और ही यहां की बस यूपी जा रही हैं। दोनों तरफ से जो निजी बसें भी चल रही हैं वह भी सरहद पार नहीं कर रही हैं।
यूपी की बस बड़ौली तक और करनाल की ओर से जाने वाली निजी बस भी यमुना पुल पार नहीं करती। ऐसे में दोनों तरफ के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। करीब डेढ़ से दो किलोमीटर सरहद का रास्ता दोनों ओर के यात्रियों को पैदल ही तय करना पड़ता है। कई बार सामान आैर छोटे-छोटे बच्चों के साथ यह सफर लोगों को भारी मुश्किल लगने लगता है।

करनालसे शामली मेरठ रूट रोजाना चलती हैं करीब 17 बसें : करनालसे शामली एवं मेरठ रूट के लिए प्रतिदिन अाैसतन 17 बसें चलती हैं। जबकि शामली और मेरठ से करीब 27 बसे प्रतिदिन यात्रियों को लेकर चलती है। लेकिन यह बसें एक-दूसरे के प्रदेश की सीमा नहीं क्रास करती। यमुना पुलिस से करीब दो किलोमीटर पहले ही दोनों ओर की बसें सवारियों को उतार देती हैं। वहां से यात्रियों को करीब दो किलोमीटर पैदल चलने के बाद ही आगे के लिए बस मिलती है। एक अनुमान के मुताबिक करनाल की ओर से 4 हजार और मेरठ, शामली की ओर से करीब 7 हजार लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं जिन्हें इस समस्या से दो-चार होना पड़ता है।

रोडवेज बस चली तो ये होगा फायदा: करनाल रोडवेज की पहल यदि कारगर साबित होती है तो यात्रियों को इसका फायदा आवागमन में सुविधा के रूप में मिलेगा। अभी यात्री प्राइवेट परिवहन के भरोसे हैं। दूसरी ओर अवैध वाहन चालक यात्रियों से मनमानी किराया वसूलते हैं जिसपर लगाम लग सकेगी। रोडवेज की आमदनी बढ़ेगी जो सीधे तौर पर सरकार के राजस्व में इजाफा है। इसके अलावा दैनिक यात्रियों खासकर नौकरी पेशा एवं विद्यार्थी जिन्हें रोज इधर-उधर आना-जाना पड़ता है उन्हें सहूलियत मिलेगी।

बंदिश खत्म होने के संकेत : सरहद की बंदिशें शीघ्र ही खत्म होने वाली है। यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए रोडवेज ने करनाल-मेरठ और करनाल- शामली रूट पर बस परिचालन के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विभाग ने उत्तर प्रदेश रोडवेज अथॉरिटी से पत्राचार किया है। साथ ही हरियाणा सरकार से भी इस संबंध में ठाेस कदम उठाने की गुजारिश की हैै। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस दिशा में अभी तक काफी सकारात्मक रिजल्ट मिले हैं। ऐसे में यदि सब कुछ बेहतर रहा तो उक्त रूट पर दोनों ओर की बसों का परिचालन प्रारंभ हो जाएगा।
परमिट के बावजूद परमिशन नहीं : करनाल रोडवेज के पास उक्त रूट पर अपनी बस चलाने के लिए परमिट है। यही नहीं करनाल रोडवेज अथॉरिटी ने बाकायदा रोड टैक्स अन्य औपचारिकताएं भी पूरी कर रखी हैं। बावजूद इसके व्यवहारिक तौर पर रोडवेज बसों का परिचालन नहीं कर पा रहा है। संबंधित परमिट के आधार पर करनाल से शामली के लिए बस सेवा शुरू की गई, लेकिन यह पहल कारगर नहीं हुई। यूपी रोडवेज अथॉरिटी की आपत्ति के बाद दो दिन में परिचालन बंद करना पड़ा।

तकनीकी वजह : इन रूट पर बसों का परिचालन होने की तकनीकी वजह परिचालन परमिट पर यूपी सरकार द्वारा काउंटर साइन किया जाना है क्योंकि यूपी सरकार करनाल-शामली करनाल-मेरठ को परिचालन रूट ही नहीं मानती। इसके पीछे भी तकनीकी दिक्कत है। एक दशक पहले बसों के परिचालन को लेकर यूपी हरियाणा सरकार में माइलेज आदि संबंधित जो समझाैता हुआ, बताते हैं कि उसमें करनाल से शामली और करनाल से मेरठ को बस रूट के तौर पर नहीं शामिल किया गया। तभी से यह तकनीकी पेंच फंसा हुआ है।
''करनाल से शामली मेरठ रूट पर बस परिचालन की डिमांड लंबे समय से है। क्योंकि रोडवेज बसें चलने से इन रूटों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हम इस समस्या के स्थायी निराकरण के प्रयास में हैं। इसके लिए एग्रीमेंट में करनाल से शामली और करनाल से मेरठ को रूट के तौर पर शामिल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार को पत्र लिखा गया है, यूपी सरकार से भी बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि शीघ्र उक्त रूट पर दोनों ओर की बस परिचालन शुरू हो जाएगा।'' - रविंद्र पाठक, महाप्रबंधक रोडवेज करनाल।

''सरहद का विवाद आम जनता से जुड़ा मसला है। रोडवेज बसें तो चल ही नहीं रहीं इस समय प्राइवेट बसें भी करनाल नहीं जा पा रही है। यात्रियों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। हमने प्रमुख सचिव परिवहन को इस संबंध में पत्र लिखकर सभी बिंदुओं से अवगत करा दिया है। शासन से इस बात की गुजारिश की गई है कि उक्त रूट पर बसों का परिचालन शुरू कराया जाए। जो भी होगा शासन स्तर से होगा। जिसका हमें भी इंतजार है।'' सुजीत कुमार,एआरटीओ शामली
उधर की बस इधर रही, ही इधर से उधर, यात्री दो किलोमीटर चल रहे पैदल।