लचीला फसल प्रणाली विकसित करने पर मंथन
केंद्रीयमृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में आठ दिवसीय संरक्षित खेती के सिद्धांतों पर आधारित समयानुसार एवं लचीली फसल प्रणाली विकसित करने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (बीज) डाॅ. जेएस चौहान ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके डाॅ. चौहान ने कहा कि लगातार संपूर्ण फसल प्रणाली से भूमि में मुख्य तत्वों की कमी होती जा रही है और उसे पूरा करने के लिए संरक्षित खेती की अहम भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि विश्व में भूमि कटाव से 30 प्रतिशत फसलीय भूमि अनुत्पादक हो रही है। इसीलिए यह जरूरी हो गया है कि हमें प्राकृतिक संसाधनों जल एवं भूमि को संरक्षित करना होगा।
जलएवं मृदा के लिए सतत प्रणाली अपनाई जाए : संस्थानके निदेशक डाॅ. दिनेश कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि जल और मृदा के लिए सतत प्रणाली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता एवं कम समय में अधिक उत्पादन लेने की तकनीकियों पर जोर देना होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में 19 वैज्ञानिकों ने लिया हिस्सा
सीरियलसिस्टम इनवीसियेटिव फॉर साउथ एशिया परियोजना (सीसा) प्रोजेक्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं अनुसंधान केन्द्र, मैक्सिको के संयुक्त प्रयास से यह कार्यक्रम प्रायोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं अनुसंधान केन्द्र के 19 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इस पाठ्यक्रम के समन्वयक डाॅ. पीसी शर्मा ने मुख्य अतिथि तथा विभिन्न प्रदेशों से आए सभी प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए इस पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा दी।
करनाल . सीएसएसआरआईमें बैठक में भाग लेते संस्थान के पदाधिकारी।