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दुख साझा करना ही साहित्य : बाबूराम

7 वर्ष पहले
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करनाल. डीआईजीट्रैफिक एंड हाईवे शिबास कविराज के नेतृत्व में आरटीए करनाल के संयोजन में एक पखवाड़े तक चला करनाल के सभी कस्बों से गुजरता हुआ सड़क सुरक्षा अभियान का पड़ाव बना डीएवी महाविद्यालय का पुस्तकालय भवन।
जब विद्यार्थियों ने हरियाणा में है यातायात का इतिहास जागा गीत के साथ नाटक त्रासदी का संगीतात्मक मंचन किया तो ऐसा लगा रहा था मानो हरियाणा के युवा शपथ ले रहे हैं कि हरियाणा की सड़कों पर अब खून नहीं बहने देंगे।

नाटक की प्रस्तुति के उपरांत मुख्य अतिथि डॉ. बाबूराम विभागाध्यक्ष हिंदी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कहा कि नाटक समकालीन प्रश्नों को लोगों के बीच ले जाता है।
शताब्दी पहले जहां भारतेंदु हरिशचंद्र रचित नाटक अंधेर नगरी चौपट राजा ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी थी, वहीं आज नई पीढ़ी के सामूहिक रचनाकर्म के रूप में हरियाणा की सरजमीं पर भारतेंदु बाबू की जयंती के अवसर पर यह मंचन उनकी स्मृति को सलाम है। उन्होंने कहा कि साहित्य पठनीय तभी होता है जब वह अपने समय की समस्याओं को रेखांकित करता है। त्रासदी नाटक ऐसा करने का सकारात्मक प्रयास है।
डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा ने भी नाटक मंचन की सराहना की। नाटक की निर्देशक रीता रंजन ने कहा कि यह नाटक लोकप्रिय शिक्षा का माध्यम है। नाटक हरियाणवी लोकरंग का प्रदर्शन ही नहीं है, बल्कि साधारण भाषा, जीवंत संवाद, समाज को साहित्य से रूबरू कराने का माध्यम है।

नाटक दुर्घटना की विभीषिका को दर्शाता है

एनएसएसइंचार्ज डॉ. सुलोचना नैन ने कहा कि यह नाटक विद्यार्थियों में सड़क की दुर्घटना की विभीषिका का दर्शन कराता है। एनएसएस के डॉ. सुमित गुप्ता ने कहा कि नाटक हमारे परिसर की रचनात्मक उपलब्धि है। इस नाटक के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि कैसे नई पीढ़ी साहित्य प्रसार माध्यम बनती है। गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सैकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्या शोभा चौहान ने कहा कि हमारे विद्यार्थियों ने इन नाटकों की प्रस्तुति के माध्यम से संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाई है।

कलाकारों को किया पुरस्कृत : नाटकमंच करने वाले कलाकारों राखी, साक्षी, सोनम, आरती, सरिता, नितिन, उदभव, विकल्प, रितू, अनामिका को परिवहन विभाग के आरटीए आरके सिंह द्वारा पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।