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ईश्वर का सच्चा स्वरूप वेदों में : विवेकानंद

7 वर्ष पहले
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आर्यसमाज दादूपुर कलां में चल रहे तीन दिवसीय वेदकथा आध्यात्मिक योग शिविर के समापन समारोह में रोजड़ गुजरात से आए स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने कहा कि ईश्वर का सच्चा स्वरूप केवल वेदों में है और वैदिक मार्ग के बिना मोक्ष की कल्पना नहीं की जा सकती।

मृत्यु जैसे बंधन से यदि हमें छुटना है और सच्चे ईश्वर को प्राप्त करना है तो वेदों की शरण में आना ही होगा अन्यथा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमान, महर्षि जैमिनी, पतंजलि, कणाद, कपिल, गौतम और स्वामी दयानन्द सरस्वती जैसे महापुरुषों ने जीवन पर्यन्त वेदों का अनुसरण किया और उनका प्रचार-प्रसार भी। इन सभी ऋषियों और महापुरुषों के मार्ग को अपनाकर ही हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। स्वामी जी ने विशेषरूप से महिलाओं के बारे कहा कि बच्चों को सुसंस्कार देने के लिए उनकी नियमित दिनचर्चा, स्वाध्याय, हवन-यज्ञ करने, माता-पिता आचार्य गुरु की आज्ञा का पालन करने के संस्कार देने चाहिए।

वितरित किया साहित्य

शिविरमें आए समस्त प्रतिभागियों को स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक द्वारा लिखित साहित्य नि:शुल्क वितरित किया गया। इस मौके पर प्रधान मलखान सिंह आर्य, देशराज, लहरी सिंह, मंत्री रामकुमार, पृथ्वी सिंह, रामकुमार, पंडित मनोहरलाल आर्य, धर्मसिंह, यशपाल, सुमन रानी, ओमप्रकाश, सुभाष आढ़ती कुरुक्षेत्र, पुरुषोत्तम जुंडला, रामकिशन आर्य, प्रो. आनंंद सिंह, कर्मसिंह, मा. रणबीर कौल, मास्टर तरसेम सिंह, कैप्टन अजमेर आर्य, उदमसिंह, सुरेश आर्य, सोहनलाल आर्य, सतपाल आर्य, रमेश आर्य, यशपाल आर्य, अमित आर्य, मिस्त्री राजेन्द्र आर्य आदि मौजूद रहे।

योग शिविर में बच्चों तथा साधकों को संबोधित करते स्वामी विवेकानंद परिव्राजक।