(एमडीडी बाल भवन फूसगढ़ के बाहर लगाया गया पालना।)
करनाल। बच्चों की जल्दी सुध ली जाए, इसके लिए एमडीडी बाल भवन फूसगढ़ के बाहर रखे गए पालने में सेंसर लगाए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा, जब कोई व्यक्ति पालने में बच्चा रखकर जाएगा तो चंद लम्हों में बाल भवन के कमरों की बेल बज जाएंगी।
बिना समय गंवाए, बच्चे को बाल भवन ले जाया जाएगा। ऐसे में सर्दी हो या गर्मी दोनों की मौसम में बच्चे की देखभाल ठीक से हो सकेगी। क्योंकि कई लोग बिना बेल बजाए ही बच्चे को यहां पर रखकर चले जा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बाल भवन प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
'' पालने में जल्द ही सेंसर लगाए जाएंगे। इसके लिए नोयडा बात हुई है, ताकि समय रहते बेल बज जाए और हमारे कर्मचारी बच्चे को तुरंत अंदर ला सकें।'' पीआरनाथ, संस्थापक एमडीडी बाल भवन फूसगढ़ ।
15 से 25 दिन की है दिशा : दो दिन पहले जिस बच्ची को कोई व्यक्ति बाल भवन के पालने में छोड़कर गया था। उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। जिसमें यह बात सामने आई है कि दिशा की उम्र दो या सात दिन नहीं, बल्कि उसकी उम्र 15 से 25 दिन के बीच है। दिशा को पंचकूला भेजा जाएगा या यहीं पर रखा जाएगा यह फैसला जिला प्रशासन को करना है। इस संदर्भ में डीसी जे गणेशन ने बाल भवन का दौरा भी किया है।
अब तक सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बाल भवन के बाहर लगी बेल को कई शरारती तत्व बजाकर भाग जाते हैं। इससे कर्मचारियों का समय बेवजह बर्बाद होता है। जब तक वे बाहर आते हैं तो शराती तत्व वहां से फरार हो चुके होते हैं। अब तभी बेल बजेगी, तब बच्चे को लकड़ी के पालने में डाला जाएगा। क्योंकि यह सेंसर लकड़ी के पालने के नीचे लगाए जाएंगे। जैसे ही वजन पड़ेगा, सेंसर से बेल बज उठेगी।
महिला आश्रम के समीप प्रशासन की ओर से एक पालना घर बनाया गया है। खास बात यह है कि इसमें जो पालना रखा गया है वह टूटा हुआ है। यही नहीं उस पर पूरी तरह से धूल जमी हुई है। कोई व्यक्ति किसी बच्चे को जिंदगी बचाने के मकसद से यहां छोड़ भी जाए तो इस पालने में उसकी जिंदगी ही खतरे में पड़ सकती है। यही नहीं ईंटों के जुगाड़ पर यह पालना रख दिया गया है। तेज आंधी या बरसात यह ढह भी सकता है। लोगों ने इसे बदलने की मांग की है।
कई बार शरारती करते हैं परेशान : 110 हो चुकी है संख्या : वर्ष1999 में बनाए गए एमडीडी बाल भवन में बच्चों की संख्या 110 तक पहुंच चुकी है। यहां 56 लड़के 53 लड़कियां हैं। यहां के 35 बच्चे अंग्रेजी माध्यम स्कूल तो तीन बच्चे वनस्थली विद्यापीठ में पढ़ रहे हैं। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, बैचलर ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट, मेडिकल कॉलेज मल्टीमीडिया तक का कोर्स यहां के बच्चों ने किया है।
नोएडा से लाया जाएगा सेंसर।