गीता जीने की कला है : स्वामी ज्ञानानंद
करनाल | सेक्टर9 स्थित श्री कृष्ण संकीर्तन मंडल में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता जीवन जीने कला है। गीता विश्व में ऐसा ग्रंथ, जो सर्व मान्य है। श्री गीता में सब समस्याओं का समाधान है। 5151 साल में भी गीता में किसी भी फेरबदल की आवश्यकता नहीं हुई। भगवत गीता का जो लोग विरोध कर रहे है, वह सही नहीं है, तर्क संगत नहीं है। श्रीमद भगवत गीता को काफी समय से राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने के लिए प्रयास किए जा रहे है। श्री गीता को राष्ट्रीय महत्व तो उसी समय मिल गया था, जब देश के प्रधानमंत्री विदेशों के राष्ट्राध्यक्षों को श्री गीता का स्वरूप भेंट कर रहे थे। सात सितंबर को दिल्ली के लाल किला मैदान में होने वाले कार्यक्रम में हर धर्म के व्यक्तियों ने भाग लेकर सदभावना का परिचय दिया। देश में प्रथम बार श्री गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठी है। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के सीएम की इस घोषणा का स्वागत करते है कि गीता जयंती पर बजट दोगुना किया जाएगा। केवल कुरुक्षेत्र ही नहीं प्रदेश के अन्य जिलो में भी श्री गीता जयंती मनाई जाएगी। गीता जनमानस की प्रेरणा है, समाज को एकसूत्र में कैसे बांधे रखना है यह सब सिखाता है। प्रधानमंत्री को श्री गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने लेकर जल्द ही समय लेकर मिला जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि क्यों श्री गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए।