सफलता| 804 समूह,12 हजार सदस्य, 4100 महिलाओं ने शुरू किया स्वयं रोजगार ।
घरौंडा। कम पढ़ी लिखी ग्रामीण महिलाओं ने सफलता की नई इबारत लिखी है। बचत कर महिलाओं ने 12 करोड़ 69 लाख 18 हजार 26 रुपए की राशि जमा की है। अर्पणा के सहयोग से 100 गांवों में बने महिलाओं के 804 सेल्फ हेल्प ग्रुप में 11998 ग्रामीण महिलाएं सदस्य बन चुकी हैं। अर्पणा की प्रेरणा और सहयोग से 41 सौ महिलाएं स्वरोजगार शुरू करके आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो और राह दिखाने वाला पथप्रदर्शक हो तो विकास की राह में तो शिक्षा बाधा बनती और ही ग्रामीण पृष्ठभूमि मायने रखती है। बूंद-बूंद से भरता सागर, इसे साबित कर दिखाया करनाल की महिलाओं ने। अर्पणा से जुड़ी लगभग 12 हजार महिलाओं ने संस्था की प्रेरणा से मौजूदा समय में महिलाएं केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, बल्कि 12 करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी कर चुकी हैं।
7 से हुए 804 समूह : महिलासशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत साल 1998 में तीन गांवों से शुरू होकर आज करनाल, इंद्री और घरौंडा के 100 गांवों में पहुंच चुकी है।
'' महिला सशक्तिकरण प्रोग्राम के तहत वर्ष 1998 में घरौंडा के तीन गांवों के 7 सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ शुरुआत की गई थी जो आज 100 गांवों में है। 8 सौ चार सेल्फ हेल्प ग्रुप में शामिल 12 हजार महिलाएं अब तक करीब 12 करोड़ से अधिक रुपए की राशि जमा कर चुकी है। स्वयं सहायता समूह में शामिल 4 हजार महिलाएं स्वरोजगार अपना चुकी है। सेल्फ हेल्प ग्रुप में जुड़ने से महिलाएं आत्म निर्भर हुई है और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है।''- ईश भटनागर, कार्यक्रम कॉर्डिनेटर
4 हजार महिलाओं ने अपनाया स्वरोजगार : गंगा ग्रुप की जगमती देवी के अनुसार उसने सेल्फ हेल्प ग्रुप से लोन लेकर गांव में करियाने की दुकान शुरू की। सारा कर्जा अदा करने के बाद एक लाख रुपए से अधिक उसके पास जमा है। गढ़ी खजूर गांव में ममता ग्रुप की कमला ने समूह से लोन लेकर गाड़ी ली। 9 माह में उसने लोन की पूरी अदायगी कर दी अब वह गाड़ी से 10 से 15 हजार रुपए प्रति माह कमा रही है।
समूहों को मिले पवित्र और प्रेरणादायक नाम : अलग-अलगगांवों में बने सेल्फ हेल्प ग्रुप को पवित्र और प्रेरणादायक नाम दिए गए हैं। इनमें गंगा, उजाला, किरण, राधा, जय वैष्णो माता, पार्वती, सीता, ममता, आरती, सागर और अनमोल जैसे कई नाम शामिल है। स्वयं सहायता समूह में शामिल लगभग 41 सौ महिलाएं स्वरोजगार अपना चुकी हैं। ग्रुप से लोन लेकर महिलाएं डेयरी व्यवसाय, विलेज शॉप्स, टेलरिंग और पशुपालन कर रही हैं। महिलाओं की हर महीने की छोटी बचत आज 12 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है।
अनमोल ने चमकाया नाम : गांवअमृतपुर कला में सात महिलाओं का समूह अनमोल दुग्ध समिति के नाम से डेयरी चला रहा है। महिलाओं की मेहनत और आपसी सहयोग इस कदर रंग लाया की आज पूरे जिले में अनमोल दुग्ध समिति अलग पहचान बना रही है। समूह की प्रमुख कमलेश देवी के अनुसार ग्रुप में महिलाएं दिन में सिर्फ 4 घंटे काम करके हर महीने 4 हजार से ज्यादा की कमाई कर रही है।