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अमावस्या आज 9:47 बजे से, कल ही करें पितृ श्राद्ध समापन
आज9:47 बजे से सर्व पितर अमावस्या शुरू हो जाएगी। लेकिन पितृ श्राद्ध का समापन कल ही करें। 16 दिन पितरों को आह्वान पूजन, दर्पण आदि करने के बाद अमावस्या पर पितर विसर्जन किया जाता है। पितर उनके संतान द्वारा दिए गए अन्न, फल आदि से तृप्त होकर उन्हें फलने फूलने का आशीर्वाद देकर पितृ लोक में चले जाएंगे। शास्त्रों में इस दिन का बहुत महत्व माना जाता है।
भाद्रपद की पूर्णिमा (आश्विन माह की प्रतिपदा) से श्राद्ध प्रारंभ होते हैं, तथा आश्विन की अमावस्या को श्राद्ध समाप्त हो जाते हैं। डॉ. पवन भार्गव के अनुसार यूं तो अपने प्रियजनों, पूर्वजों को स्मरण कभी भी किया जा सकता है परंतु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव के लिए श्राद्ध पक्ष की व्यवस्था हिंदू संस्कृति में की गई है। पितृ पक्ष में संकल्प पूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। कुश काले तिल से संकल्प करें। इसके अलावा गाय, कुत्ता, कोआ, चींटी देवताओं के लिए भोजन का भाग निकालकर खुले में रख दें।
करनाल . श्रादके दिनों में आने वाली अमावस्या को कौवों को भोजन कराया जाता है, मीनार रोड पर भोजन करते कौव्वे। (फोटोधर्म सिंह)
ज्योतिषाचार्य कमल कांत शर्मा ने बताया कि आज सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर अमावस्या तिथि का आगमन हो रहा है। जो अगले दिन अर्थात 24 को 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उस तिथि के श्राद्ध का महत्व तभी है। जैसे अमावस बुधवार को 11.45 बजे तक है, इसलिए अमावस का श्राद्ध बुधवार को ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमावस्या के दिन गाय, कौआ, कीड़ियों ब्राह्मण को भोजन करना चाहिए। इससे पितर संतुष्ट होते हैं। संतान अपने पितरों को पूजा अर्चना के बाद उनसे सुख समृद्धि आशीर्वाद मांगते हैं। उन्हें अगले साल भी आने का न्योता देते हैं।
भोजनमें इनका प्रयोग करें : दूध,गंगा जल, शहद, टसर का कपड़ा, तुलसी, सफेद फूल।
इनकाप्रयोग करें : कदंब,केवड़ा, मौलसिरी या लाल तथा काले रंग के फूल और बेल पत्र श्राद्ध में वर्जित हैं। उड़द, मसूर, अरहर की दाल, गाजर, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज, लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पीली सरसों आदि भी वर्जित हैं। लोहा और मिट्टी के बर्तन तथा केले के पत्तों का प्रयोग करें।