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एक क्षण में बदलेगा जीवन

7 वर्ष पहले
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बच्चेबड़े होकर डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर,पायलट,टीचर बनने की सोचते हैं। लेकिन इन सबसे हटकर एक छात्र ऐसा भी है जो बाल्यावस्था में गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यासी बनेगा। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र पवन जैन इंद्री रोड स्थित श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में पिछले छह-सात माह से रहकर संन्यासियों का जीवन व्यतीत कर रहा है। पिता बिजनेसमैन ने बेटे की जिद के आगे झुकते हुए वैरागी बनने की आज्ञा दे दी। छात्र पवन जैन मंदिर में ही रहकर जैन धर्म की दीक्षा प्राप्त करेगा। संत पीयूष मुनि ने बताया कि छात्र पवन जैन का जीवन एक क्षण में ही बदल जाएगा। उसका जीवन अब लोगों के उत्थान,उनकी सुख समृद्धि में व्यतीत होगा।

हरजगह जाएगा पैदल

संतबनने के बाद पवन जैन जहां पर भी जाएगा, वह पैदल जाएगा। वह जीवन में काम आने वाली अर्थात भौतिक वस्तुओं का प्रयोग नहीं करेगा। चाहे गर्मी हो, सर्दी हो, बरसात हो या अन्य कुछ। संत बनने के बाद कोई भी इन वस्तुओं का प्रयोग नहीं कर सकता। इसके अलावा साधुओं के व्रतों का पालन करना, रात का भोजन नहीं करना शामिल है। संन्यासियों का जीवन काफी कठोर होता है। जो उन्हें गृहस्थ जीवन से अलग करता है।

मेहंदीकी रस्म 27 को : इंद्रीरोड स्थित श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में राष्ट्र संत वाचनाचार्य श्री मनोहर मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में वैरागी पवन जैन दीक्षा लेकर संन्यासी जीवन धारण कर रहा है। वैरागी की मेहंदी की रस्म 27 सितंबर को दोपहर 3 से 5 बजे तक आराधना मंदिर के अरिहंत सभागार में होगी। श्रद्धालुओं द्वारा मंगल गीत गाए जाएंगे और वैरागी के सफल साधनामय जीवन के लिए मंगलमय आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दी जाएंगी। पवन जैन 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है।

करीब तीन साल से सत्संग में रहा है छात्र

संतपीयूष मुनि ने बताया कि मंदिर में राष्ट्र संत मनोहर मुनि के अलावा, संत पीयूष मुनि संत संमयेश मुनि रहते है। पवन जैन चौथे संत बनने वाले हैं। पवन जैन पिछले तीन साल से लगातार सत्संग में रहा था। उनका जीवन सत्संग सुनकर बदल गया। माता पिता, परिजनों से संन्यासी जीवन व्यतीत करने की आज्ञा ली। क्योंकि बिना माता पिता की आज्ञा से कोई भी संत नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि संत बनने के बाद पवन जैन का जीवन समाज की सेवा करना, अपना कल्याण करना, ज्यादा से ज्यादा समय आध्यात्मिक में व्यतीत होगा।