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हेड ऑफिस से सरकार के पास भेजी फाइल, अनुमति मिलने का इंतजार
पश्चिमीबाइपास के निर्माण की प्रक्रिया दो कदम और आगे बढ़ गई है। पीडब्ल्यूडी के हेड ऑफिस से अब यह फाइल सरकार के पास भेज दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि सरकार इसे जल्द ही फाइनल भी कर सकती है। वहां से फाइनल होते ही इस पर तुरंत प्रभाव से कार्य भी शुरू हो सकता है।
ऐसे में लोगों को जाम से मुक्ति मिल सकती है। यही नहीं शहर में होने वाले हादसों में भी कमी आने की संभावना बन सकती है। गौरतलब है कि गत दिनों सीएम ने करनाल आगमन पर सीधे तौर पर अधिकारियों को आदेश जारी किए थे कि सिटी का पश्चिमी बाइपास का निर्माण समय से कर दिया जाए। इसके लिए तीन दिन तक का सर्वे भी विभाग की ओर कराया गया है।
यहहै काफी पुरानी मांग
यहमांग शहर की काफी पुरानी है। कई बार सर्वे हुए, लेकिन पूर्व सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब हालत यह हो चुकी है कि चिड़ाव मोड़ से असंध, जींद, हिसार, कैथल, पटियाला आदि के वाहन आते हैं। यहां से हांसी चौक तक रोजाना जाम की नौबत बनी रहती है। इससे वाहन चालकों का काफी समय बर्बाद हो जाता है। इसलिए इस योजना को समय रहते अमलीजामा पहनाए जाने की जरूरत और भी तेज हो गई है।
पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारी पहले ही यह कह चुके हैं कि यह बाइपास उचाना गांव के समीप जीटी रोड से मिल जाएगा, इसके अलावा इसे घोघड़ीपुर के समीप हांसी रोड पर जोड़ा जाना है। इससे भारी वाहन बाहर से ही जीटी रोड पर निकल जाएंगे। शहर में भारी वाहनों की एंट्री होने से हादसों में भी काफी कमी सकती है।
43करोड़ ओवरब्रिज, 40 करोड़ बाईपास पर होंगे खर्च
करनालके पश्चिमी इलाके से गुजर रही पश्चिमी यमुना नहर के शहर की तरफ के किनारे पर यह 10 मीटर चौड़ाई का बाइपास बनाया जाना है। इस पर कुल मिलाकर 83 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जानी है। 43 करोड़ रुपए की राशि रेलवे ओवरब्रिज पर खर्च होगी, यह उचाना गांव के समीप बनाया जाना है। इसके अलावा 40 करोड़ रुपए बाइपास के निर्माण पर खर्च करने की योजना बनाई गई है।