कौटिल्य के स्कूल में 8वीं में पढ़ता है कोहंड का आशु।
करनाल। कोहंड गांव का आशु शर्मा मैमोरी के क्षेत्र में विश्व रिकार्ड बनाने लिए तैयार है। उसका दावा है कि वह 25 से 28 सैकेंड में पीरियोडिक टेबल सुना सकता है। अपनी इस मैमोरी से वह हिम्मत भारत के 36 सैकेंड के वर्ल्ड रिकार्ड को तोड़ने की ख्वाइश रखता है। इसी प्रयास में वह लगातार पीरियोडिक और अधिक तेजी से उच्चारित करने का अभ्यास कर रहा है।
कौटिल्य पंडित के एसडी हरित माडर्न स्कूल कोहंड में ही आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला आशु शर्मा विज्ञान विषय की पीरियोडिक टेबल को बड़ी स्पष्टता और तेजी से बोलता है। उसकी इस विशिष्टता से उसके स्कूल के अध्यापक भी प्रभावित हैं। अपने स्कूले में यह बच्चा चर्चा का पात्र बना हुआ है।
आशु शर्मा का कहना है कि उसे यह प्रेरणा कौटिल्य पंडित से मिली है। जब कौटिल्य को टीवी पर देखते तो बहुत अच्छा लगता। वे अपनी बातों में उनका जिक्र करते थे। दिल ने कहा कि उसे भी कुछ करना चाहिए, इसलिए तभी से उसने पीरियोडिक टेबल को कम से कम समय में बोलने का अभ्यास किया। अब वह 25 से 28 सैकेंड में पूरी पीरियोडिक टेबल को सुना सकता है।
हिम्मत भारद्वाज का रिकार्ड तोड़ने की क्षमता : आशु के गुरु कौटिल्य पंडित के पिता सतीश शर्मा ने कहा कि आशु शर्मा मैमोरी किंग हिम्मत भारद्वाज के वर्ल्ड रिकार्ड को तोड़ने की क्षमता रखता है। उन्होंने आशु शर्मा का कई बार परीक्षण किया वह पीरियोडिक टेबल को 25 से 28 सैकेंड में सुना देता है, जबकि हिम्मत भारद्वाज का विश्व रिकार्ड 36 सैकेंड का है।
आशु जो कुछ भी याद करता है उसे वह अच्छे से याद रहता है। उसे तीन पुस्तककें पूरी तरह से याद है। इनमें एक छठी कक्षा की साइंस और सातवीं आठवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तकें शामिल हैं। इसके साथ ही उसे जीके के 15 सवाल भी याद हैं। स्कूल के शिक्षिक विजय पाल उन्हें जनरल नॉलेज की प्रेक्टिस कराते हैं। वह लू सेंट की पुस्तक 3 घंटे पढ़ता है।
कविता आॅन स्पॉट: निरक्षर मां-बाप के बेटे आशु की कुशाग्र बुद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह ऑन स्पाॅट किसी भी विषय पर कविताओं की रचना कर देता है। अपने देश भारत पर 500 पंक्तियों की कविता की रचना कर चुका है।
'' इस बच्चे की स्मृति श्रेष्ठ स्तर की है। इसे रोट मैमोरी भी कहते हैं। इस उम्र में बच्चों पर बौद्धिक कार्यों को बोझ कम रहता है। इसलिए उन्हें जल्दी याद होता है और लंबे समय तक याद रहता है। एेसे बच्चों की बुद्धि सामान्य से ज्यादा हो सकती है। ''- प्रो.सीआर डारोलिया, पूर्व अध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग केयू।