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स्पीड टेस्ट रिजल्ट के आधार पर हर जिले को मिलेंगी खेल नर्सरी

6 वर्ष पहले
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प्रदेशसरकार की ओर से अब नई खेल नीति के तहत खेल नर्सरियों की सुविधा दी जाएगी। अपने करनाल को भी खेल नर्सरी मिलेंगी, लेकिन कौन सी खेल नर्सरी मिलेंगी, इसका फैसला स्पीड टेस्ट के फाइनल परिणाम के बाद ही होगा। सरकार स्पीड टेस्ट के परिणाम देखकर ही खेल नर्सरी की घोषणा करेगी।

जहां जिन खेलों में खिलाड़ियों के सर्वोत्तम परिणाम होंगे, वहां उन्हीं खेलों में नर्सरियों की सुविधा प्रदान की जाएगी। प्रतिभा के धनी खिलाड़ियों को भी सरकार की तरफ से सहयोग नहीं मिल पा रहा है। खेल विभाग की ओर से कर्ण स्टेडियम में खेल नर्सरी की सुविधा देने की मांग दो साल से की हुई है, जबकि जिले के खिलाड़ी तो कई वर्षों से यह मांग करते रहे हैं।

फिलहाल उन्हें यह सुविधा नहीं मिल सकी है। खेल अधिकारियों द्वारा भेजी गई डिमांड के अनुसार कर्ण स्टेडियम के लिए वालीबाॅल बाॅक्सिंग खेल नर्सरी मांगी हुई है, क्योंकि इन खेलों के प्रति खिलाड़ियों का खासा रुझान बना है। वालीबॉल में तो करनाल ने विश्व स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया है। कई खिलाड़ियों ने भीम अर्जुन अवार्ड का गौरव करनाल को दिया है।

^नई खेल नीति के तहत सरकार स्पीड टेस्ट के परिणामों को देखकर ही खेल नर्सरी की सुविधा देगी। जिन खेलों का अच्छा परिणाम होगा उन्हीं खेलों की नर्सरी सरकार घोषित करेगी। इसके साथ ही नर्सरी के लिए खिलाड़ियों का चयन भी इन्हीं खिलाड़ियों से होगा। कर्मचंद,डीएसओ, करनाल।

कांग्रेस सरकार ने डे-बोर्डिंग नर्सरी देने की बात की थी, लेकिन करनाल के खिलाड़ियों को बोर्डिंग नर्सरी की जरूरत है। खिलाड़ी पंकज, संजीव, अनुज, जयपाल और संदीप का कहना है कि बोर्डिंग नर्सरी से ही खिलाड़ी वास्तव में सरकार की सुविधाओं से लाभांवित हो सकते हैं, क्योंकि डे-बोर्डिंग नर्सरी का लाभ ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्राप्त करना मुश्किल हो गया है। इससे उन्हें कोई लाभ भी नहीं होगा, क्योंिक वे ग्रामीण क्षेत्र से आएंगे। इससे गांव से आने-जाने में ही उनका अिधकांश समय बर्बाद हो जाएगा। इस कारण करनाल में बोर्डिंग नर्सरी स्थािपत की जानी चािहए।

नॉलेज : बोर्डिंग और डे-बोर्डिंग नर्सरी में ये अंतर

डे-बोर्डिंगनर्सरी में खिलाड़ियों को खेलने के लिए बुलाया जाता है और उन्हें सरकार की ओर से निश्चित राशि डाइट के रूप में दी जाती है, लेकिन बोर्डिंग नर्सरी में खिलाड़ियों का निवास स्टेडियम परिसर में ही होता है। इन खिलाड़ियों के खाने-पीने, रहने के साथ-साथ पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी सरकार ही वहन करती है। इस स्थिति में ये खिलाड़ी खेलों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई का पूरा टाइम दे पाते हैं।

करनाल . कर्णस्टेडियम में टेस्ट देता एक खिलाड़ी।