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अब धनौरा एस्केप से यमुना नहर में नहीं जाएगा गंदा पानी
यमुनानगर में लगे 25 एमएलडी एसटीपी की क्षमता बढ़ाकर की जाएगी 50 एमएलडी
राकेशकुमार | गढ़ी बीरबल
पब्लिकहेल्थ डिपार्टमेंट आैर इरीगेशन डिपार्टमेंट और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इन तीन अधिकारियों ने मिलकर पूरे डिस्क ड्रेन का धनौरा के साथ-साथ यमुना में जो पानी जा रहा है, वहां का निरीक्षण कर लिया है। हरियाणा प्रदूषण विभाग यमुनानगर के रीजनल अधिकारी पीके शर्मा ने बताया कि यमुना में पानी पहुंचने से पहले वहां पर गंदे पानी को साफ करने का एक ट्रीटमेंट प्लांट यानि जल शोधक यंत्र लगाया जाएगा।
यमुनानगर में जो 25 एमएलडी का एसटीपी है, उसे पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ मिलकर हम उसे 25 एमएलडी से बढ़ाकर 50 एमएलडी कर रही है। उसके बाद यमुना में किसी भी तरह का गंदा पानी ही नहीं जा सकेगा। जो कि सरकार के पास विचाराधीन है जिस पर जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। वहीं सभी समय समय पर सभी फैक्टरियों के सेंपल लिए जाते है। फैक्टरी का सेंपल फेल होता है। फिर चाहे वह जल प्रदूषण हो या वायु प्रदूषण उसे बंद कर दिया जाता है। इससे लोगों को लाभ होगा।
ग्रामीणों की ये है परेशानी
जितेंद्रकुमार, अनिल, कर्ण सिंह, दीपक, मामचंद, संजीव कुमार, विक्रम, कपिल कुमार, पम्मू सलिंद्र आदि का कहना है कि पीछे से ही फैक्ट्रियों में से इसमें गंदा पानी छोड़े जाने के कारण अब तो इस नदी का पानी इतना ज्यादा काला और गंदा हो चुका है कि इससे आसपास के वातावरण में दुर्गन्ध फैल रही है। जिसके कारण अब इस नदी के पास से गुजरते हुए भी गंदी बदबू आती है। जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। जिससे यहां कोई भी संभावित बीमारी फैल सकती है।
गढ़ी बीरबल . धनौराएस्केप में बह रहा गंदा पानी।
नदी का पानी हो चुका है काला
एकतरफ पिछले दिनों जहां सरकार ने स्वच्छता अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया था। वहीं निरंतर बढ़ते हुए औद्योगिकरण के चलते वातावरण में लगातार प्रदूषण फैल रहा है। इतना ही नहीं प्रदूषण से जहां वायु मण्डल प्रदूषित हो रहा है, वहीं फैक्टरियों से निकले कैमिकल युक्त गंदा पानी नदियों में मिलकर जहर घोल रहा है। हालत यह है कि कलरी जागीर, गढ़ी बीरबल, हंसूमाजरा जैसे गांवों के पास से होकर गुजरने वाली धनौरा एस्केप नदी का पानी अब काला हो चुका है।