करनाल। पारा अचानक 1.4 डिग्री तक कम हो गया है। नमी बढ़ चुकी है और हवा का दबाव भी दोपहर बाद बढ़ गया है। ऐसे में मौसम खराब होने के चांस बन चुके हैं। अगले 24 घंटे में बूंदाबांदी भी हो सकती है। यही नहीं न्यूनतम तापमान में भी कुछ बढ़ोतरी होने के आसार हैं। हालांकि 200 मीटर दृश्यता की धुंध कई इलाकों में चुकी है। यानि कुल मिलाकर अगले दो से तीन दिनों तक अधिकतम तापमान के कम होने न्यूनतम तापमान के बढ़ने की संभावना है। दिन में लोगों को कुछ ठंडक का सामना करना पड़ सकता है। पाक से आया डब्ल्यूडी ठिठुरन लेकर आया है।
सुबह उठे तो महसूस हुई ठंडक
शुक्रवारसुबह जब लोग सोकर उठे तो बाहर ठंडक बढ़ी हुई मिली। क्योंकि पारा 5.2 डिग्री से घटकर 3.8 डिग्री पर गया था। अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस पर कायम है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार गुरुवार सीजन का सबसे ठंडा दिन आंका गया है। राजस्थान के चुरु इलाके में पारा दो डिग्री तक रहा। इसी तरह मैदानी इलाकों में पहले की अपेक्षा काफी ठंडक बढ़ चुकी है।
बढ़ गया है हवा का दबाव : बरसात के लिए जरुरी हवा का दबाव अब दोपहर बाद बढ़ चुका है। जहां सुबह यह 6.5 डिग्री रहा, वहीं दोपहर बाद यह बढ़कर 8.0 डिग्री तक पहुंच गया। नमी सुबह 92 दोपहर बाद 44 फीसदी रही। हवा की गति 2.2 किलोमीटर औसतन आंकी गई है। अल सुबह कुछ हलके बादल आसमान में दिख रहे थे, लेकिन दोपहर बाद यह कम हो गए।
दिसंबर माह में कई बार बड़ी बरसात हो जाती रही है। अगले दो दिनों में बरसात की संभावना भी है। वर्ष 1967 में दिसंबर माह में 67 एमएम बरसात दर्ज की गई थी। जबकि वर्ष 2010 में दिसंबर के महीने में 28 एमएम बरसात आंकी गई थी। वर्ष 2011 में 11 एमएम बरसात हुई थी। दिसंबर में अक्सर जब भी बरसात होती है तो इससे ठंड का प्रकोप बढ़ जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बरसात होती है तो ठंड अब और भी बढ़ सकती है।
आगे क्या होगा : नमी और हवा का दबाव बढ़ जाने के कारण आज आसमान में बादल निकल सकते हैं, जिससे बूंदाबांदी की संभावना बनेगी।
ये है पिछले दस बरस में दिसंबर में ठंड का ब्यौरा
वर्ष तारीख तापमान
200427 दिसंबर 3.7 डिग्री
2005 15 दिसंबर 2.5 डिग्री
2006 29 दिसंबर 4.0 डिग्री
2007 19 दिसंबर 2.0 डिग्री
2008 27 दिसंबर 3.4 डिग्री
2009 26 दिसंबर 1.9 डिग्री
2010 22 दिसंबर 3.4 डिग्री
2011 25 दिसंबर 1.2 डिग्री
2012 24 दिसंबर 3.9 डिग्री
2013 30 दिसंबर 0.2 डिग्री
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41 साल पहले का रिकाॅर्ड
पिछलेसालों की बात करें तो दिसंबर माह में भी पारा शून्य से कई बार नीचे गया है। 31 दिसंबर 1973 को न्यूनतम तापमान -0.4 डिग्री तक चला गया था। तब के बाद अब तक दिसंबर इतना ठंडा कभी नहीं गुजरा। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अबकी बार दिसंबर माह में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री से नीचे कभी नहीं गया है। फिलहाल शुक्रवार का दिन सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा है।
गेहूं को मिलेगा अब लाभ
कृषिविभाग के उप निदेशक डॉ. पवन कुमार शर्मा का कहना है कि अब यदि बरसात हो जाती है तो यह गेहूं की फसल में नाइट्रोजन का काम करेगी। इससे जिन किसानों ने सिंचाई नहीं की है तो इससे एक सिंचाई का काम भी चल सकता है। यानि काफी समय के बाद जो बरसात होगी तो इससे लाभ तो मिलेगा ही, हां बरसात नहीं भी होती है तो ठंडक भी फसल के लिए लाभदायक है।
अब गुलजार होंगे बाजार
सर्दीके बढ़ पाने के कारण अब तक बाजारों में भी रौनक कम ही थी। क्योंकि गर्म वस्त्रों की बिक्री ने जोर नहीं पकड़ा था, लेकिन अब ठंड अचानक बढ़ गई है और पारा 4 डिग्री से नीचे गया है। बरसात हो जाती है तो इससे गर्म वस्त्रों की बिक्री और भी बढ़ सकती है। रेडिमेड गारमेंट का काम करने वाले राजा शनि का कहना है कि बाजार काफी ठंडा है अब कुछ इसमें उछाल आने की संभावना बन सकती है।
(करनाल . तापमान में अचानक 1.4 डिग्री की गिरावट के बाद हाइवे पर छाई धुंध)