सड़क मरम्मत नहीं, सुदृढ़ीकरण की जरूरत
जिलेमें सड़कों की हालत बदहाल है। सीएम डिस्ट्रिक्ट में सड़कों को मरम्मत की नहीं, बल्कि उन्हें सुदृढ़ीकरण की जरूरत है। जिले की अधिकतर सड़कों को कई वर्षों से सुदृढ़ीकरण की जरूरत है। टूटी और संकरी सड़कें दुर्घटनाओं का सबब बन रही हैं।
करनाल जिले की बात करें तो लगभग 1500 किलोमीटर की लंबाई में सड़कों का जाल बिछा हुआ है। लेकिन जब सड़कों की दशा को देखा जाता है तो अधिकतर का बुरा हाल मिलता है। बुरा हाल मिले भी ताे क्यों नहीं, क्योंकि कथित तौर पर पिछले तीन सालों में अधिकतर सड़कों की स्ट्रेंथनिंग ही नहीं हुई है। इस कारण से सड़कों की दशा और बिगड़ती जा रही है। कई सड़कों में बजरी उखड़ने के बाद गड्ढे बन गए हैं। टूटी सड़कों से दुपहिया वाहनों सफर अधिक कठिन हो गया है। जिले के किसी भी हलके में देखा जाएगा टूटी सड़कों के नमूने खुद दिखाई देने लगेंगे।
गड्ढेभरने में जुटा है विभाग
पीडब्ल्यूडीविभाग सड़कों का सुदृढ़ीकरण करने की बजाए उन पर बने गड्ढों को पैच लगाकर भरने में जुटा हुआ है। लेकिन सड़कों पर एक जगह पैच लगाए जाते हैं तो फिर आगे गड्ढे तैयार हो जाते हैं। इस स्थिति में सड़कों की कारपेटिंग भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। विभागीय सूत्राें के अनुसार सड़कों का सुदृढ़ीकरण किया जाना जरूरी है।
सड़कोंपर ट्रैफिक का बढ़ गया लोड
जिलेकी अधिकतर सड़कों को पुराने टैफिक लोड के अनुसार बनाया हुआ है, लेकिन वर्तमान में सड़कों पर ट्रैफिक लोड बढ़ गया है। इसके अलावा ग्रामीण अंचल के लिंक रोड पर हैवी वेट वाहन चलने लगे हैं। इसलिए यह सड़कें अधिक दिनों तक नहीं चल पाती है और हेवी वेट वाहनों की आवाजाही से टूट जाती हैं।
बाढ़ से ध्वस्त सड़काें को सुधार का इंतजार
यमुनाक्षेत्र में बाढ़ के कारण ध्वस्त हुई सड़कों में से बहुत सी सड़कों की दशा नहीं सुधर पाई है। जबकि शासन प्रशासन ने इन सड़कों को जल्द सुधारने के दावे किए थे। लेकिन एक साल बीतने के बाद लोगों को सड़कों के सुधरने की जरूरत है। इसलिए इन सड़कों पर जल्द से जल्द कार्य शुरू होना चाहिए।
गांव से गांव को जोड़ने वाली बहुत सी सड़कें संकरी हालात में हैं। जबकि आज दोनों साइडों से वाहनों की लगातार आवाजाही रहने लगी है। इस तरह से संकरी सड़कों का अब जमाना नहीं रहा है। अब इन सड़कों को भी कम से कम 18 फुट चौड़ा बनाने की आवश्यकता है।
बनना चाहिए बेसिक प्रोग्राम