किसानछत पर भी पशुओ
एग्रो भास्कर | पानीपत
अबकिसानों को फीड या खली के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है। किसान के लिए एक ऐसी मशीन का निर्माण किया गया है जिसे किसान अपने खेत में रॉ मैटीरियल के पास ले जाएगा और वहीं पर बिजली से चलने वाली इस मशीन के जरिए पशु, मछली या मुर्गियों के लिए आहार तैयार कर सकेगा। इस मशीन में किसानों को सबसे बड़ी सुविधा यह होगी कि किसान के खेत में ही रॉ मैटीरियल होता है और किसान खुद शुद्ध खली या फीड तैयार कर सकेगा। कंपनी ने इसे मिनी फीड प्लांट नाम दिया है। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, क
किसानछत पर भी पशुओं के लिए चारा उगा सकते हैं, वह भी मिट्टी के बिना। यह हरा चारा पौष्टिकता की दृष्टि से भी काफी बेहतर होगा क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा 18 फीसदी तक होती है, जबकि खेत में उगने वाले चारे में 13 से 14 फीसदी प्रोटीन पाया जाता है। पांच लाख रुपए कीमत की एक मशीन तैयार की गई है। यह रोजाना 90 से 100 किलोग्राम चारा उगा सकती है। करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित साइंस कांफ्रेंस के दौरान स्टाल पर इसे दर्शाया गया है। कंपनी प्रतिनिधि का दावा है कि मशीन से उगे चारे से पशुओं का दूध 10 फीसदी तक बढ़ जाता है। पशुपालक की आय भी बढ़ेगी।
पहले सात दिन किसान को चारा नहीं मिलेगा, इसके बाद पशुओं के लिए सात-सात दिन के सर्कल के चक्र में रोजाना चारा उपलब्ध होता रहेगा। खास बात यह है कि इस चारे को हाइड्रोपॉनिक तरीके से उगाया जाता है और इसमें मिट्टी की जरूरत ही नहीं पड़ती। इससे चारे में किसी तरह की बीमारी आदि का खतरा भी नहीं रहता।
जो किसान बड़े स्तर पर पशु पालन कर रहे हैं और बाजार से उन्हें आए दिन फीड या खली पर निर्भर रहना पड़ रहा है, उन किसानों के लिए यह मशीन काफी कारगर साबित हो सकती है। इससे केवल किसान का समय बचेगा, बल्कि सस्ते में ही फीड खेत में तैयार हो जाएगा। वह दूसरे पशुपालकों को भी फीड की सप्लाई कर सकता है।
मशीन हर रोज 14 यूनिट बिजली खर्च करती है। इससे चारे में किसी तरह का रोग नहीं होता कयोंकि कंट्रोल एनवायरमेंट होता है। इसका तापमान 24 डिग्री तक रखा जाता है। रेफ्रीजरेशन यूनिट लगी हुई है। बड़ी डेयरी चलाने वाले पशुपालक इसे अपना सकते हैं।
2.5 लाख से 5 10 लाख रुपए कीमत में यह मशीन बनाई गई हैं। पांच लाख रुपए की लागत वाली मशीन से किसान एक घंटे में 100 किलोग्राम खली या फीड तैयार कर सकता है। इसे किसान अपने घर पर पशु, मुर्गियों या मछलियों के अलावा बाजार के लिए भी फीड तैयार कर सकता है।
मशीन में रोजाना करीब 2 से 3 लीटर पानी की जरूरत होती है। यदि इतना ही चारा बाहर उगाया जाए तो किसान को 70 से 80 लीटर पानी खर्च करना पड़ेगा। इससे पानी की बचत भी होगी। वहीं उच्च गुणवत्ता वाला चारा पशुपालक को मिल जाएगा। प्रदेश में करीब 1.14 लाख हेक्टेयर में गन्ना 12 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है।
अब तक रोजाना 200 से 600 टन के प्लांटों में इस तरह का फीड या खल तैयार की जाती रही है। नई मशीन में दाना, केक, दवाई आदि डालकर साइंटीफिक तरीके से बैलेंस बनाकर गाय, भैंस, मछली के लिए ग्रेडिंग के हिसाब से फूड तैयार किया जा सकेगा।
इसमें 20 हार्स पावर की मोटरें और पूरी मशीन के नीचे पहिए लगे हुए हैं।