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जांच के लिए आई केंद्र की टीम, पधाना में किसानों ने सुनाई आपबीती

7 वर्ष पहले
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(सूखा जांचने के लिए केंद्र से आई टीम के सदस्य।)
करनाल| सूखा अब की बार किसानों के 2.88 अरब रुपए निगल गया है। यह राशि किसानों ने 15 जून से अब तक धान की करीब 1.64 लाख हेक्टेयर फसल पर अतिरिक्त खर्च की है। क्योंकि अबकी बार प्रदेश में बरसात सामान्य से करीब 54 फीसदी कम हुई है। इसका असर करनाल जिले पर भी पड़ा है। किसानों को धान की फसल को पकाने के लिए प्रति एकड़ सात हजार रुपए तक खर्च करने पड़े हैं। यह आंकड़ा कृषि विभाग ने केंद्र से आई सूखा जांच टीम को बताया है। अब यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि किसानों को प्रति एकड़ कितना मुआवजा दिया जाएगा।

ये रहे टीम में शामिल : जिसटीम ने पधाना गांव का दौरा किया है, उसमें प्रमुख रुप से वसुधा मिश्रा, विजय कुमार बठला, रवि भूषण, मनोजीत डे, रामराज मीणा, कृषि विभाग हरियाणा के निदेशक बृजेंद्र सिंह, एडिशनल डायरेक्टर डॉ. सुरेश गहलावत, एडीसी गिरीश अरोड़ा, जिला उप कृषि निदेशक डॉ. पवन कुमार शर्मा, तहसीलदार हरिओम अत्री सहित कृषि विभाग अन्य विभागों के आला अधिकारी शामिल हैं।
मुआवजे की राशि सही दी जाए : रविवार को केंद्र से आई सूखा जांचने की टीम तरावड़ी के समीपवर्ती गांव पधाना में पहुंची और यहां किसानों से बातचीत की। किसानों ने कहा कि उन्हें जहां धान की फसल में सात हजार रुपए तक अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी है। वहीं उनकी करेला की फसल सूखे की वजह से तबाह हो गई है। किसानों ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार उन्हें इतना मुआवजा जरूर दे कि नुकसान की भरपाई हो सके। कहीं ऐसा हो कि किसानों के साथ पहले की तरह मजाक किया जाए। क्योंकि किसान पहले ही धान पर काफी राशि खर्च कर चुके हैं।

डीएचओ डॉ. मदन लाल ने केंद्र से आई टीम को बताया है कि जिलेभर में करीब 1200 एकड़ क्षेत्र में करेला की फसल अन्य बेल वाली फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। क्योंकि सब्जी की फसल को अधिक खर्च करना पड़ता है। इसके बाद ही फसल का उत्पादन होता है और यह मंडी तक पहुंचाई जाती है। सितंबर माह में हुई करीब 256 एमएम बरसात से पकी हुई धान की फसल खराब हो गई हैं। सरबती पूसा बासमती-1509 फसल को इस बरसात का नुकसान अधिक हुआ है।
टीम ने पधाना गांव का दौरा किया है, टीम को बताया गया है कि अबकी बार किसानों को धान में प्रति एकड़ पांच से सात हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं। यही नहीं करेला की फसल भी खराब हुई है। डॉ.पवन कुमार शर्मा, जिलाउप कृषि निदेशक करनाल।
टीमने करनाल का दौरा किया है। धान की फसल पर किसानों को प्रति एकड़ अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी है। इस बाबत टीम को अवगत करा दिया गया है। डॉ.सुरेश गहलावत, एडिशनलकृषि निदेशक हरियाणा।

ये हुई है मानसून में अब तक बरसात
प्रदेशमें एक जून से 30 सितंबर तक मानसून का समय होता है। अबकी बार जून, जुलाई, अगस्त में सामान्य से काफी कम बरसात हुई है, जबकि सितंबर में अब तक 256 एमएम बरसात हुई है। अब तक यहां 614 एमएम बरसात हो चुकी है, जो कि गत वर्ष की 875 एमएम से करीब 161 एमएम कम है।

किसानों ने जताया एतराज
भारतीयकिसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य का कहना है कि केंद्र की टीम ने मात्र एक गांव का दौरा कर यह फैसला कर लिया कि कितना नुकसान हुआ है। यह मात्र दिखावा है। टीम को जिलेभर के सभी ब्लाकों का दौरा कर देखना चाहिए था कि इस बार सूखे के कारण किसानों को कितनी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा है। किसानों को प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाना चाहिए।

सूखे ने निगले किसानों के 2.88 अरब रुपए
मुआवजे की राशि सही दी जाए
1200 एकड़ में करेला फसल बर्बाद

- करेला की 1200 एकड़ फसल हुई खराब, धान में सात हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करनी पड़ी है राशि।