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जागरूकता से दुर्घटना शून्य हरियाणा संभव : नैन

7 वर्ष पहले
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परिवहनविभाग की पहल पर सड़क सुरक्षा अभियान के तहत आरटीए आरके सिंह एवं डीआईजी ट्रैफिक एंड हाईवे शिबास कविराज की संयुक्त पहल पर नाटक त्रासदी का मंचन राजकीय महिला महाविद्यालय रेलवे रोड करनाल के परिसर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए प्राचार्य महाबीर नैन ने कहा कि विकासशील भारत में सड़क दुर्घटना युवा पीढ़ी के लिए अभिशाप है।

आंकड़े बता रहे हैं कि जितने लोग महायुद्ध में नहीं मारे गए, उससे कहीं अधिक लोग प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। नाटक के उपरांत लोगों से रूबरू होते हुए सड़क सुरक्षा परिषद हरियाणा के सदस्य राजीव रंजन ने कहा कि कोई भी सामाजिक परिवर्तन युवाओं के जागृत होने पर ही हुआ है। दुर्घटनाएं तभी रूकेंगी जब युवा जागृत होगा। विज्ञान के आविष्कार मनुष्य की बेहतरी के लिए हैं, कि विज्ञान मनुष्य की हत्या के लिए।

रोड इंजीनियरिंग के इस दौर में सड़क दुर्घटना वर्तमान वैज्ञानिक समय पर सवालिया निशान है। नाटक के संगीत निर्देशक डॉ. रश्मित ने कहा कि संगीत दुखद समय में भी जिंदगी की उष्मा पैदा करता है। त्रासदी नाटक में सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना कविता समय की भयावहता को उजागर करती है। नाटक की निर्देशक रीता रंजन ने कहा नाटक त्रासदी हर मंचन के बाद युवाओं के संवाद से और जीवंत हो जाता है। अभी इन नाटकों के मंचन का सफर आरंभ हुआ है। अभी इसे हरियाणा के सभी जिलों में संयोजित किया जाना बाकी है। ट्रैफिक एंड हाईवे के एएसआई प्रदीप कुमार ने कहा कि हरियाणा में हर माह लगभग तीन सौ से चार सौ लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटना में होती है। ऐसे में बिना युवाओं को प्रेरित किए, हरियाणा के इस समकालीन प्रश्न से निजात नहीं मिलेगी।

तीन हजार छात्राओं की उपस्थिति में हुआ नाटक

जबयह नाटक मंचित किया जा रहा था वहां पर तीन हजार छात्राओं की उपस्थिति मानो यह ऐलान कर रही हो कि बेटियां जिंदाबाद थी, बेटियां जिंदाबाद हैं और बेटियां जिंदाबाद रहेंगी। दृश्य बड़ा ही मार्मिक था।

उत्सव का प्रतीक बना प्रतिभा खोज कार्यक्रम

इसअवसर पर दुष्यंत की पंक्ति सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए, प्रासंगिक हो गई। प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का यह उत्सव सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक बन गया।

काॅलेज में आयोजित कार्यक्रम में त्रासदी नाटक का म