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निश्चित समय पर धान की रोपाई से मिलती है अच्छी पैदावार : डॉ. केवी

7 वर्ष पहले
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भारतीयकृषि अनुसंधान संस्थान करनाल की ओर से चलाए जा रहे कृषक सहभागिता कार्यक्रम के तहत बरास गांव में प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।

जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने पहुंच उन्नत किस्म के बीज उत्पादन की जानकारी ली। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक डॉ. केवी प्रभू ने किया। उन्होंने उपस्थित किसानों को निश्चित समय पर धान की रोपाई करने के लिए प्रेरित किया। ताकि कम खर्च पर धान की गुणवत्ता युक्त अच्छी पैदावार ली जा सके।

बिजाईसे पूर्व बीज उपचार की सलाह दी : इसदौरान उन्होंने बिजाई से पूर्व बीजोपचार, रोपाई बिजाई का उचित समय, फसल में आने वाली विभिन्न बीमारियों की रोकथाम के उपाय आगामी फसल गेहूं सरसों की सहित खरीफ की अन्य फसलों की समय के अनुसार बिजाई करने की सलाह दी। कृषि वैज्ञानिकों ने सरदार गुरचरण सिंह के धान बीजोत्पादन प्लाटों का भ्रमण किया। उन्होंने बासमती धान की किस्म पूसा 44, पूसा बासमती 1509, बासमती 1121 पूसा बासमती एक सहित धान की विभिन्न प्रजातियों के बीजोत्पादन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने किसानों को कृषक सहभागिता द्वारा गुणवत्ता बीज की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया। ताकि किसानों की बीज की मांग पूरी की जा सके।

निसिंग. बीजउत्पादन कार्यक्रम में संस्थान के संयुक्त निदेशक को शाॅल भेंट करते किसान गुरचरण सिंह।

धान की नई प्रजातियों के बारे में दी जानकारी

इसदौरान भरतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली के संभागाध्यक्ष डॉ.. अशोक कुमार ने किसानों को धान की आने वाली नई प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी समय में कीट रोग रोधी किस्म पीबी 1121, पीबी 1, पीबी 1509 पीबी 6 के विकास के बारे में बताया। कार्यक्रम में करनाल के अध्यक्ष डॉ.. सलविंद्र अटवाल ने बताया की बासमती धान लगभग 120 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है।