लाइसेंस बनवाने के लिए भटक रहा विकलांग
देशमें रहने वाले हर व्यक्ति को वोट डालने का अधिकार है, उसे संविधान के अनुसार सब अधिकार मिले हुए हैं। जो उसे मिलने चाहिए। लेकिन विकलांग होने से गांव गोंदर के रामपाल के अधिकारों में जिला प्रशासन कटौती कर रहा है।
रामपाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए एसडीएम कार्यालय के बार बार चक्कर लगा रहा है। अधिकारी ने तो एक बार उसका लाइसेंस बनाने की सहमति दे दी। लेकिन उसके बार डॉक्टरों अन्य द्वारा होने वाली सभी कागजी कार्रवाई यहां तक की ड्राइविंग टेस्ट भी पास कर लिया। इतना सब होने के बाद भी उसके विकलांग होने का मजाक उड़ाया जा रहा है। रामपाल ने कहा कि वह सौ प्रतिशत विकलांग है। जो उसके लिए गुनाह बन गया है। वह विकलांग होने के बाद भी कार चलाकर अपना जीवन यापन कर रहा है। लेकिन अधिकारी लोग उसका लाइसेंस नहीं बना रहे हैं। इस कारण उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसने अपनी कार में हाथ से क्लच, रेस आदि सिस्टम लगवा लिए हैं। उन्हीं के सहारे वह कार चलाकर रोजी रोटी कमाकर परिवार का पेट पाल रहा है। लेकिन अधिकारी हैं कि उनकी सुनते ही नहीं। उसने जिला प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता से तंग आकर प्रदेश सरकार से मांग की है कि उसे जो वोट डालने का अधिकार मिला हुआ है। उसे वापस ले लिया जाए।
करनाल . विकलांगरामपाल।
कार चलवाकर देखी फिर भी नहीं बनाया लाइसेंस
सेक्टर12 में ड्राइविंग टेस्ट लेने वाले वालों ने उनका ड्राइविंग टेस्ट लिया गया। कार चलवाकर देखी गई। लेकिन फिर भी उनका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवाया गया। एक बार तो एसडीएम ने भी कह दिया था कि आपका लाइसेंस बना दिया जाएगा।
^मामले की जानकारी ली जा रही है। अगर नियमों के अनुसार रामपाल का ड्राइविंग लाइसेंस बन सकता है तो उसे अवश्य बनाया जाएगा। डॉ.सुशील मलिक, एसडीएमकरनाल।