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भजन एक आसान उपाय : महाराज

7 वर्ष पहले
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श्रीराम कृष्ण संकीर्तन मंडल शिवपुरी अर्जुन गेट की ओर से चल रहे दिव्य भागवत ज्ञान यज्ञ समारोह में व्यास पीठ डाॅ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज भिक्षु के सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है। पं. अभय मिश्रा ने व्यास पूजा पावन जोत को पवन गिरधर ने परिवार सहित प्रज्जवलित किया। भजन प्रस्तुति बंसी लाल राही ने दी। महाराज ने कथा करते हुए कहा कि हमारा धर्म पिल्लर पर टिका है। यह मजबूत होना चाहिए। भागवत सुनने के लिए श्रेष्ठ वक्ता, श्रेष्ठ श्रोता शुद्ध वातावरण होना चाहिए। भजन एक आसान उपाय है। भजन में सिमरण सेवा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिमरण में चित शुद्धि, व्यवहार शुद्धि होनी चाहिए। शुभ कर्म से सद् गति प्राप्त होती है। धर्म के पिल्लर की परिभाषा है कल्याण, व्यवहार मोक्ष।

उन्होंने बताया कि कल्याण, मोक्ष, शुभ कर्म तत्वाज्ञान से होता है। संत भक्त और भक्ति से तृप्त होते है। कर्म धर्म की परिभाषा है। यह लोक और परलोक अच्छा बनाती है। उन्होंने 24 अवतारों के नाम गौरंग, चैतन्य, मीरा भक्ति का वर्णन किया। परमात्मा सत्य है। उनके चरणों में नमन करो। उसके होने का एहसास करो। एहसास से ब्रह्म जी को चारों वेदों का ज्ञान हो गया था। श्री कृष्ण वैष्णव धन मानों और श्रद्धालु को वैष्णव भक्त। इस अवसर पर प्रधान अमरदास दुआ, पूर्ण चंद मुटरेजा, ठाकर चंद सीकरी, श्याम सुंदर मदान, वेद नारंग, राकेश मदान, मोहन लाल सुखीजा, सुरेंद्र भुटानी, हर गोपाल खुराना, नरेंद्र गांधी, जगन नाथ बत्तरा, हरबंस लाल, केएल सोढ़ी, एसएन सिंगला, एमएल अरोड़ा, एससी अरोड़ा, केवल कृष्ण, नंद लाल, गोपाल कृष्ण, रामलाल गांधी, मास्टर शिव शर्मा, प्रेम अरोड़ा, ज्ञान चंद मुंजाल, बृजलाल गर्ग, एसी गांधी, देवी दयाल सहित अन्य मौजूद रहे।

असंध. स्थानीयजीवन चानन सामुदायिक भवन में चल रहे पांच दिवसीय श्रीराम कथामृत महोत्सव के पहले दिन आशुतोष जी महाराज की शिष्या सुश्री सौम्या भारती ने अवतार वाद पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने समझाया कि जब-जब इस धरती पर पापाचार, अत्याचार, अनाचार का बोलबाला होता है वह निराकार सत्ता साकार रूप धारण कर धरती पर अवतरित होती है। उन्होंने प्रभु श्रीराम को जगपालक संपूर्ण सृष्टि के नियामक तत्व बताया जो साकार रूप धारण कर अयोध्या में अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे मानव शरीर का प्रतीक है जिसमें प्रभु श्रीराम निवास करते हैं।