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विद्वानों के मार्गदर्शन से बेहतरीन स्थिति में है संस्थान

6 वर्ष पहले
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आईसीएआर-एनडीआरआईने डा. एनएन दस्तूर एवं डा. केके अइया स्मारक व्याख्यान पुरस्कार डा. हर्ष कुमार भानवाला, अध्यक्ष, नेशनल बैंक कृषि एवं ग्रामीण विकास (नाबार्ड) मुम्बई, तथा डा. नगेंद्र पी. शाह प्रोफेसर, खाद्य विज्ञान एवं डेयरी प्रौधोगिकी, हांगकांग विश्वविद्यालय को प्रदान किया।

डा. एके श्रीवास्तव, निदेशक एवं कुलपति, आईसीएआर-एनडीआरआई ने कहा कि डा. दस्तूर एवं डा. के.के. आइया जैसे दिग्गज विद्वानों के मार्गदर्शन के कारण ही संस्थान बेहतरीन स्थिति में है। उन्होंने माननीय वक्ताओं (डा. भानवाला और डा. शाह) के प्रशस्ति पत्र पढ़ कर सुनाए।

उन्होंने यह भी सूचित किया कि नाबार्ड के सौजन्य से राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान में एक प्रोफेसर पद प्रतिष्ठित किया जा रहा है। इसके अलावा संस्थान में नियमित रूप से आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय डेयरी मेले के लिए नाबार्ड के सहयोग से स्थायी मंच तैयार किया जाएगा। डा. हर्ष कुमार भानवाला ने ‘लघु कृषकों की संपन्नता के लिए पशुधन शक्ति को उन्नत बनाना’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि 19वें अखिल भारतीय पशुगणना के अनुसार वर्ष 2012 में देश में कुल पशुधन संख्या 512 मिलियन थी, जोकि विश्व में सबसे अधिक थी। उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालन देश में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में आजीविका का एक प्रमुख साधन है। परंपरागत रूप से, पशुपालन महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक है, जोकि इससे संबंधित क्रियाकलापों में ही लगी रहती थी।

ग्रामीण परिवारों में सफल गृह निर्माता वही है जोकि परिवार एवं फार्म की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पशुधन को उन्नत कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पशुपालन कमजोर वर्ग एवं लघु कृषकों के लिए श्रेष्ठ है। इस अवसर पर उन्होंने विगत कुछ दशकों में संस्थान द्वारा की गई प्रगति की सराहना की। डा. नगेंद्र पी. शाह ने ‘पनीर में वसा एवं लवण अंशों को कम करने एवं प्रोबायोटिक (प्रतिजैवियो)का प्रयोग कर स्वास्थ्य में सुधार’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि फुल फैट मोजरैला पनीर में लगभग 25 प्रतिशत वसा होती है, क्योंकि संपूर्ण विश्व में उपभोक्ता अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। अत: अल्प वसायुक्त मोजरैला पनीर विकसित करने का महत्व है। अल्प वसायुक्त मोजरैला पनीर विकसित करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है। जब वसा हटा दी जाती है तो प्रतिकूल परिवर्तन होते हैं तथा पनीर में परिणामस्वरूप कड़ापन जाता है। कम वसा वाले पनीर की लोकप्रियता बढ़ रही है।

डाॅ. एनएन दस्तूर और डाॅ. केके आइया स्मारक व्याख्यान पुरस्कार देते अतिथि।