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आजादी के प्रथम संदेश वाहक थे स्वामी दयानंद सरस्वती : अरोड़ा

6 वर्ष पहले
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महर्षिदयानंद सरस्वती की 191वीं जयंती पर प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति द्वारा शहीदों के मंदिर में जयंती सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन चरित्र पर विस्तार से चर्चा की। समिति के सदस्यों ने महर्षि दयानंद के चित्र के समक्ष नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामीमहान चिंतक और समाज सुधारक थे

जयंतीसभा की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष नरेंद्र अरोड़ा राष्ट्रीय सचिव रामकुमार सल्याण ने की। जयंती सभा को संबोधित करते हुए नरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज सुधारक देशभक्त थे। उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। स्वामी जी ने कर्म सिद्धांत पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य तथा सन्यास को अपने दर्शन के चार स्तंभ बनाया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद भारतीय आजादी के प्रथम संदेशवाहक थे। राष्ट्रीय स्वतंत्रता में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

अंधविश्वासोंके विरुध आपसी भाईचारे के समर्थक

स्वामीदयानंद ने छुआछूत, सतीप्रथा, बालविवाह, नरबलि, धार्मिक संकीर्णता तथा अंध विश्वासों के विरूद्ध जमकर प्रचार किया और विधवा विवाह, धार्मिक उदारता तथा आपसी भाईचारे का समर्थन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से विजय कुमारी शर्मा, निर्मल फूले, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हरदीप राणा, सतीश पांचाल, रामर| अत्री, जगदीश अरोड़ा, अमन सिंह लबाणा, सुखविंद्र सिंह, फतेह सिंह, तारा चंद सैनी, वासुदेव गौतम, रामप्रकाश शर्मा, सुल्तान सिंह आदि उपस्थित थे।

करनाल.पुष्प अर्पितकरते प्रतिभा रक्षा सम्मान समिति के सदस्य।