मिशन से जुड़कर किया स्वावलंबन का अहसास
पतिको शराब पीने की लत थी। गरीबी बेरोजगारी के कारण दो वक्त का भोजन भी दूबर हो रहा था। घर में कलह बढ़ रहा था, परन्तु हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर सब कुछ ठीक होने लगा। अब हालात बदलने लगे हैं। परिवार में सुख चैन का माहौल फिर से लौट आया है। यह कहना है जय बजरंग बली महिला ग्राम संगठन स्टौंडी की अध्यक्ष प्रभा का।
प्रभा बताती हैं कि वह करीब 6 महीने पहले हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी। बरेली से आई महिलाओं की टीम द्वारा दिया गया प्रशिक्षण परिवार के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया और अब यह किरण प्रकाशमय हो गई है, जिसका अन्य महिलाएं भी लाभ उठा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने आपको खाली महसूस करती हैं। केवल पति की कमाई पर अपना परिवार बच्चों को गुजारा करना पड़ता है। इसके लिए परिवार को आगे बढ़ाने के लिए, पति को आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से उन्होंने हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में शामिल होकर जीवन की नई शुरूआत की है। मिशन द्वारा उन्हें काम चलाने के लिए 15 हजार रुपए रिवॉल्विंग फंड दिया गया। जब यह रिवॉल्विंग फंड मिला तो उन्हें आशा जगी कि अब उनके दिन जरूर फिरेंगे और अब वह अन्य महिलाओं को भी गांव-गांव जाकर जागरूक कर रही हैं।
स्वयंसहायता समूह से बढ़ा सकती हैं आमदनी
स्थानीयलघु सचिवालय स्थित डीआईपीआरओ कार्यालय में बातचीत के दौरान हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक जुबिन सालू ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गृहिणी महिलाएं भी प्रयास करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बढ़ा सकती हैं। 10 महिलाओं को मिलाकर स्वयं सहायता समूह बन जाता है।
स्वरोजगारके लिए करेंगी महिलाओं का प्रशिक्षित
रायबरेलीसे करनाल पहुंची लीलावती, रेखा, पुष्पा और राम प्यारी ने उन्हें स्व-रोजगार के बारे में प्रशिक्षित किया। स्टौंडी गांव की प्रभा, सरिता, नीलम, सुमन और मंजू अब करनाल की महिलाओं को स्व-रोजगार के लिए प्रशिक्षित करेगी।