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15 नहीं, 2016 में शुरू होंगीं कक्षाएं

7 वर्ष पहले
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करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कक्षाएं सत्र 2015 के बजाए 2016 से शुरू होंगी। इस सत्र में कालेज प्रशासन को मेडिकल कौंसिंल आफ इंडिया में आवेदन की मंजूरी नहीं मिली। निर्माण की स्थिति को देखते हुए तो शासन ने अप्लाई के लिए इजाजत दी और ही एमसीआई ने ही हरी झंडी। ऐसे में अब कालेज प्रशासन अगले सत्र में कक्षाएं शुरू करने की मंजूरी के लिए एमसीआई में आवेदन करेगा। जिसके बाद सत्र 2016 से कक्षाएं विधिवत शुरू हो पाएंगी।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की 100 सीटें निर्धारित हैं। जिनमें प्रवेश एवं कक्षाएं शुरू होने की बात शैक्षिक सत्र 2015 से कही जा रही थी। लेकिन निर्माण की स्थिति को देखते हुए यह कक्षाएं 15 के बजाए सत्र 2016 से प्रारंभ होंगी। शासन ने पाया कि कालेज के निर्माण की जो प्रगति है उसमें 2015 के शैक्षिक सत्र से कक्षाएं शुरू करा पाना संभव नहीं है। ऐसे में कालेज प्रशासन को कक्षाएं शुरू करने के लिए सालू सत्र में मंजूरी नहीं दी गई और आवेदन का समय निकल गया।

2015 में कक्षाएं शुरू करना किसी भी तरह से संभव नहीं है और हमने 2015 की बात नहीं की। ही इसके लिए एमसीआई में आवेदन किया। चूंकि इसी प्रोसीडिंग लंबी हैं, हम 2015 में कक्षाएं शुरू करने के लिए एमसीआई में आवेदन करेंगे और सत्र 2016 से कल्पना चावला मेडिकल कालेज में कक्षाएं शुरू होंगी। हमने कार्यदायी संस्था को टीचिंग ब्लाक, आडिटोरियम और हास्पिटल सेक्शन का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए कह दिया है। बाकी कार्य यदि थोड़ा आगे पीछे भी हुआ तो दिक्कत नहीं आएगी। डॉक्टर सुरेंद्र कश्यप, निदेशककल्पना चावला मेडिकल काॅलेज।

काॅलेज प्रशासन के तर्क
काॅलेजप्रशासन के मुताबिक 9 नवंबर 2013 को मेडिकल काॅलेज निर्माण की शुरुआत हुई। प्रोजेक्ट के लिए 25 माह का समय है। अभी करीब 10 माह बीते हैं जबकि 15 महीने का समय शेष है। ऐसे में काम की प्रगति का आंकलन जल्दबाजी होगी। अक्टूबर 2015 को प्रोजेक्ट पूरा करके बिल्डिंग कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज प्रशासन को हैंडओवर कर देगी।

काॅलेज प्रशासन ने निर्माण की प्राथमिकता तय करते हुए उसे अंजाम देने की बात कार्यदायी संस्था से कही है। इसके तहत टीचिंग ब्लाक, हास्पिटल और ऑडिटोरियम के निर्माण का काम पहले चरण में पूरा करके कालेज को हैंडओवर कर दिया जाएगा। जबकि आवासीय परिसर, पार्किंग आदि का निर्माण बाद में पूरा होता रहेगा। तर्क है कि यदि उक्त तीन सेक्शन बन बनकर पहले मिल जाते हैं तो सिर्फ कक्षाएं बल्कि ओपीडी आदि का काम बेहतर ढंग से शुरू हो जाएगा।

साढ़े 6 सौ करोड़ रुपए के मेडिकल काॅलेज के प्रोजेक्ट काे मंजूरी मिले करीब दो साल हो चुके हैं। निर्माण में भी कई महीने का समय बीत गया, लेकिन काम की प्रगति अभी पचास फीसदी भी नहीं पहुंची। ऐसे में तय समय में किस प्रोजेक्ट कैसे पूरा होगा। यह बड़ा सवाल है। बता दें कि हास्पिटल सर्विस कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन इसकी कार्यदायी संस्था है। जिसके अंडर में सुप्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड जेएमसी प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड कंपनी अलग-अलग ब्लाक में निर्माण कार्य को अंजाम दे रही हैं।

कक्षाएं शुरू करने के लिए कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज प्रशासन को एक साल पहले मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया में आवेदन करना होता है। आवेदन की आखिरी तारीख 30-31 अगस्त थी। आवेदन मिलने के बाद एमसीआई विभिन्न पहलुओं पर गहना से विश्लेषण करने के बाद कक्षाएं शुरू करने की मंजूरी देता है। चूंकि अगस्त का महीना बीत चुका है। इसलिए अब अगस्त 2015 में ही कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज प्रशासन के पास एमसीआई में आवेदन का मौका है।
50 फीसदी भी पूरा नहीं काम , तय की प्राथमिकता, यह है प्रक्रिया

कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज में इस साल नहीं मिली आवेदन की परमिशन
(करनाल . कल्पना चावला राजकीय मेडिकल काॅलेज निर्माण में लगे मजदूर। )